नयी दिल्ली। एक अंग्रेजी अखबार में छह फरवरी को छपी 'मेघालय में अवैध कोयला खदान (Illegal Coal Mining) में धमाके से 18 की मौत' शीर्षक वाली मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) की प्रधान पीठ ने पर्यावरण कानूनों के निरंतर उल्लंघन पर गंभीर चिंता व्यक्त है। यह चिंता तब व्यक्त की गयी है जब एनजीटी ने 'रैट-होल' कोयला खनन (Rat-hole coal mining) पर लंबे समय से प्रतिबंध लगा रखा है और इस प्रतिबंध को उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा है। अधिकरण ने मंगलवार को टिप्पणी किया कि मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में अवैध रूप से संचालित 'रैट-होल' कोयला खदान में डायनामाइट विस्फोट के कारण हुई यह घटना प्रथम दृष्टया में पर्यावरण (Protection) अधिनियम 1986, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 और भारतीय वन अधिनियम 1927 के उल्लंघन का संकेत देती है।
अधिकरण ने इन आरोपों पर भी गौर किया कि मौजूदा निगरानी तंत्र के बावजूद प्रभावशाली व्यक्तियों के संरक्षण में अवैध खनन गतिविधियां लगातार जारी हैं। इस मामले पर अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ ए सेंथिल वेल की पीठ ने विचार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए और 'बृहन्मुंबई नगर निगम बनाम अंकिता सिन्हा व अन्य (2021)' मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए अधिकरण ने मेघालय सरकार के मुख्य सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के शिलांग स्थित एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय और ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के उपायुक्त को प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है। पीठ ने सभी प्रतिवादियों को शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 19 मई को है।



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