School Evaluation: पारदर्शी, सरल और डिजिटल होगा स्कूल मूल्यांकन तंत्र : शर्मा

Thu, Jan 08 , 2026, 09:58 PM

Source : Uni India

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों (digital school) की गुणवत्ता को नए सिरे से परखने और सुदृढ़ करने की दिशा में अब पारदर्शी, सरल और पूरी तरह डिजिटल स्कूल मूल्यांकन व्यवस्था लागू की जा रही है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, (Parth Sarathi Sen Sharma) उत्तर प्रदेश शासन पार्थ सारथी सेन शर्मा ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा (Secondary Education) नीति-2020 की भावना के अनुरूप स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क के माध्यम से विद्यालयों का आकलन दंड या निरीक्षण आधारित नहीं, बल्कि आत्ममूल्यांकन, मार्गदर्शन और सतत सुधार के सिद्धांत पर किया जाएगा। उन्होने कहा कि इसका उद्देश्य किसी भी रूप में विद्यालयों को हतोत्साहित करना नहीं है, बल्कि शैक्षिक चुनौतियों की पहचान कर उन्हें गुणवत्ता सुधार के लिए सक्षम बनाना है। यह फ्रेमवर्क केवल मूल्यांकन का दस्तावेज नहीं, बल्कि ऐसा मार्गदर्शक तंत्र है, जो विद्यालयों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित होने में सहायता करेगा।

उन्होंने बताया कि फ्रेमवर्क के 'स्टैंडर्ड्स और मैकेनिज्म' दो प्रमुख घटक हैं। मैकेनिज्म को इस प्रकार विकसित किया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, डिजिटल और उपयोगकर्ता-अनुकूल हो, जिससे विद्यालयों को अनुपालन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। वहीं स्टैंडर्ड्स ऐसे बनाए जा रहे हैं, जिनसे प्रधानाचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक सभी को यह स्पष्ट समझ हो सके कि विद्यालय का मूल्यांकन किन बिंदुओं पर किया जा रहा है और सुधार की दिशा क्या है। पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि फ्रेमवर्क का क्रियान्वयन बच्चों के समग्र हित को केंद्र में रखकर किया जा रहा है। पाठ्यक्रम, शिक्षण प्रक्रिया, विद्यालय-सामुदायिक सहभागिता, विद्यालय का सामाजिक प्रभाव और पाठ्य सहगामी गतिविधियों को मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस प्रक्रिया से शिक्षकों और अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश श्रीमती मोनिका रानी ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी सकारात्मक शैक्षिक अनुभव आवश्यक है। शिक्षक केवल विषयवस्तु पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि बच्चों के मार्गदर्शक होते हैं, इसलिए फ्रेमवर्क को संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाएगा। कार्यशाला में एससीईआरटी, एसएसएसए तथा विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रधानाचार्य एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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