बनारसी (Banarasi) और कांजीवरम (Kanjeevaram) साड़ियों को लेकर महिलाओं में हमेशा से ही क्रेज देखने को मिलता है, क्योंकि हैंडलूम साड़ियों से रिच लुक मिलता है. एक्ट्रेस भी अक्सर कांजीवरम औैर बनारसी साड़ियों में दिखाई देती हैं. ये साड़ियां बेहद मेहनत के साथ बनाई जाती हैं और ये काफी महंगे दामों में भी आती हैं, हालांकि कई बार महिलाएं कांजीवरम और बनारसी साड़ियों में फर्क करने में चूंक जाती हैं. ऐसे में अगर आपको सही जानकारी हो तो आप आराम से कांजीवरम और बनारसी साड़ी में फर्क कर सकती हैं.
कांजीवरम साड़ी और बनारसी साड़ी लगभग देखने में एक जैसी ही लगती हैं और दोनों के फैब्रिक की चमक भी करीब बराबर ही होती है. इसलिए इनमें कई बार फर्क करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन ये काफी अलग होती हैं. तो चलिए जानते हैं कि आखिर इन दोनों हैंडलूम साड़ियों में आप कैसे अंतर पता कर सकती हैं.
कांजीवरम और बनारसी साड़ी का इतिहास
कांजीवरम साड़ी का ताल्लुक मुख्य रूप से दक्षिण भारत के तमिलनाडु से है और ये साड़ियां असली रेशम के गोल्डन धागों से बनाई जाती हैं. वहीं बनारसी साड़ी की बात करें तो इसके नाम से ही पता चलता है. ये बनारस की पहचान है. बनारसी साड़ियों को जरी के धागे से बुना जाता है और अलग-अलग पैटर्न बनाए जाते हैं.
साड़ियों का प्रिंट होता है अलग
बनारसी साड़ियों का इतिहास 2000 साल पुराना बताया जाता है. इनमें मुगल प्रेरित डिजाइन बनाए जाते हैं. इसमें आपको अमूमन बेल, पत्तियां, अमरू, अंबी, दोमक आदि के पैटर्न बने हुए देखने को मिलते हैं. इसके डिजाइन काफी सफाई के साथ बने हुए होते हैं.
लाइट पड़ते ही बदलता है सिल्क का रंग
कांजीवरम साड़ियों को शहतूत के रेशम से बनाया जाता है. ये छूने में काफी हल्की और मुलायम होती हैं. वहीं बनारसी साड़ी अपने जरी वर्क की वजह से थोड़ी भारी हो सकती हैं. अगर इन पर लाइट पड़ती है तो आप देखेंगे कि इसका फैब्रिक अलग-अलग तरह की चमक मारता है. वहीं इसके धागों को खुरचने पर अंदर सा लाल सिल्क निकलता है.



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Sun, Oct 01 , 2023, 04:47 AM