पुडुचेरी। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन (C. P. Radhakrishnan) ने सोमवार को कहा कि विद्यार्थी विकसित भारत 2047 के शिल्पकार हैं और उन्हें राष्ट्र निर्माण (nation-building) की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। राधाकृष्णन ने यहां विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह (convocation ceremony) में भाग लेते हुए कहा कि देश का भविष्य विद्यार्थियों के हाथों में है और उनका ज्ञान, नवाचार तथा ईमानदारी भारत की अगली विकास यात्रा को आकार देगी। प्राचीन तमिल ग्रंथ नालडियार का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसके शाश्वत संदेश को रेखांकित किया कि ज्ञान असीम है, लेकिन उसे अर्जित करने का समय सीमित है।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे जानकारी के विशाल सागर में से केवल वही ज्ञान ग्रहण करें जो मूल्यवान, नैतिक और सार्थक हो। उन्होंने कहा कि सूचना से भरी दुनिया में मूल्य आधारित ज्ञान को पहचानने की क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्नातकों को बधाई देते हुए उनसे सेवा, अनुशासन और समर्पण के मूल्यों को अपनाने तथा 2047 की ओर बढ़ते भारत की विकास गाथा के दूत बनने का आग्रह किया। श्री राधाकृष्णन नयी शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में महाकवि सुब्रमण्यम भारती अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र का उद्घाटन भी किया। यह केंद्र शैक्षणिक आदान-प्रदान, बौद्धिक विमर्श और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की परिकल्पना के साथ स्थापित किया गया है।



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Mon, Dec 29 , 2025, 09:02 PM