Sabarimala Tantri Bail : एसआईटी को झटका, सबरीमाला मामले में तंत्री को मिली ज़मानत!

Thu, Feb 19 , 2026, 07:28 PM

Source : Uni India

कोल्लम। चर्चित सबरीमला स्वर्ण गबन मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत कोल्लम स्थित सतर्कता न्यायालय ने सबरीमला भगवान अयप्पा मंदिर (Sabarimala Lord Ayyappa Temple)के तंत्री कंदरारु राजीवरु को जमानत दे दी है। अदालत के इस फैसले को मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसने उनकी रिहाई का कड़ा विरोध करते हुए निरंतर हिरासत की मांग की थी। राजीवरु को मंदिर के द्वार चौखटों और द्वारपालक (doorkeeper) प्रतिमाओं पर किये गये स्वर्ण मढ़ाई कार्य में कथित अनियमितताओं और स्वर्ण के दुरुपयोग के मामले में आरोपी बनाया गया था।

एसआईटी का आरोप है कि इस कार्य के निष्पादन के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुईं और इसमें मंदिर से जुड़े कुछ पदाधिकारियों तथा ठेकेदारों की मिलीभगत थी।अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के उन तर्कों पर विचार किया, जिनमें तंत्री को सीधे तौर पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से जोड़ने का प्रयास किया गया था। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि स्वर्ण गबन में तंत्री की भूमिका थी।

अदालत ने बचाव पक्ष की दलील को भी स्वीकार किया कि तंत्री की जिम्मेदारियां केवल धार्मिक और अनुष्ठानिक कार्यों तक सीमित होती हैं तथा उनका मंदिर निर्माण कार्य, सामग्री की खरीद या वित्तीय लेनदेन पर कोई प्रशासनिक नियंत्रण नहीं होता। बचाव पक्ष ने कहा कि राजीवरु का किसी भी अनुबंध या सामग्री उपयोग से संबंधित निर्णयों में कोई अधिकार नहीं है। अभियोजन पक्ष द्वारा अन्य आरोपियों के साथ तंत्री की कथित निकटता को साजिश का आधार बताने की कोशिश को भी अदालत ने पर्याप्त ठोस साक्ष्य के अभाव में स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि अभियोजन द्वारा उद्धृत कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर तंत्री के हस्ताक्षर नहीं हैं। राजीवरु 41 दिनों से न्यायिक हिरासत में थे। जमानत के साथ अदालत ने कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा और एसआईटी द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित होना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्हें सबरीमला मंदिर के पथानामथिट्टा जिले में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया गया है और पासपोर्ट जमा कराने का निर्देश दिया गया है। केरल से बाहर यात्रा के लिए उन्हें अदालत की पूर्व अनुमति लेनी होगी।

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