Ganeshji Anecdote Part 2: गणेशजी का नाम गजानन कैसे पड़ा? जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा का दूसरा पहलु!

Wed, Feb 25 , 2026, 09:30 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Ganeshji Anecdote: गणेश जी को 'गजानन' (गज + आनन = हाथी का मुख) इसलिए कहा जाता है क्योंकि शिव जी द्वारा उनका मस्तक कट जाने के बाद, उन पर हाथी का सिर लगाया गया था। इस नाम के पीछे की एक अन्य प्रमुख पौराणिक कथा के अनुसार, जब शनिदेव ने बाल गणेश को देखा, तो उनकी दृष्टि से गणेश जी का मस्तक भस्म हो गया था। 

गजानन नाम की दूसरी प्रचलित कहानी (शनि की दृष्टि):
शनिदेव का कोप: जब माता पार्वती ने गणेश जी को जन्म दिया, तो सभी देवताओं को बालक को देखने और आशीर्वाद देने के लिए बुलाया गया। शनिदेव भी वहां आए, लेकिन वे अपनी पत्नी के श्राप के कारण नजर नीची रखे हुए थे।

मस्तक भस्म: माता पार्वती के आग्रह करने पर जब शनिदेव ने गणेश जी की ओर देखा, तो उनकी दृष्टि पड़ते ही बाल गणेश का मस्तक जलकर भस्म (गायब) हो गया।

हाथी के मस्तक का सुझाव: दुखी पार्वती जी को विलाप करता देख, भगवान विष्णु ने गरुड़ पर बैठकर उत्तर दिशा में जा किसी ऐसे जीव का सिर लाने को कहा जो अपनी माता की ओर पीठ करके सो रहा हो।

गजानन का अवतरण: सबसे पहले एक हथिनी का बच्चा (हाथी) मिला, जो अपनी मां की तरफ पीठ करके सो रहा था। विष्णुजी उस हाथी के बच्चे का सिर ले आए और भगवान शिव ने उसे गणेश जी के धड़ से जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया।  हाथी का सिर (गज) होने के कारण, भगवान गणेश 'गजानन' के रूप में प्रसिद्ध हुए।

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