India-US trade Agreement: भारत-अमेरिका से समझौते से कपास किसानों को होगा बड़ा नुकसान : कांग्रेस

Mon, Feb 16 , 2026, 03:25 PM

Source : Uni India

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने भारत–अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते (India-US trade agreement) पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि मोदी सरकार (Modi government) ने देश के किसानों के हितों को नजरअंदाज कर यह समझौता किया है और इससे खासकर कपास किसानों (cotton farmers) को बड़ा नुकसान होने की संभावना है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला (Congress General Secretary Randeep Singh Surjewala) ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते से देश के कपड़ा उद्योग पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है। उनका कहना था कि यह समझौता वस्त्र क्षेत्र के लिए 'खरबों रुपये'तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है और इससे किसानों से लेकर निर्यातकों तक पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।

 सुरजेवाला के अनुसार, यदि अमेरिकी कपास और संबंधित कृषि उत्पादों का आयात शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर बढ़ता है तो इसका भारतीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों पर दबाव पड़ेगा। अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे वहां की कपास अपेक्षाकृत सस्ती होती है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में भारतीय कपास उत्पादकों की जिनिंग इकाइयों यानी कपास की पहली प्रोसेसिंग यानी कपास को रेशों को बीजों से अलग करने की प्रक्रिया वाली इकाइयाँ तथा स्पिनिंग मिलें यानी कताई मिलें जहां कपास के रेशों से कताई करके सूत तैयार करने वाली मिलों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने आशंका जताई है कि यदि अमेरिका के साथ बंगलादेश जैसे देशों के व्यापारिक प्रबंध और मजबूत होते हैं, तो भारतीय परिधान निर्यात को अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ सकती है। भारत पहले से वैश्विक बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और निर्यात ऑर्डर में कमी आने से कपड़ा उद्योग के लिए नयी चुनौती बन सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का कपड़ा और परिधान उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है। यह क्षेत्र लाखों किसानों, बुनकरों, श्रमिकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़ा हैऔर यदि सस्ते आयात के कारण घरेलू कीमतों में गिरावट आती है और मिलों का लाभांश घटेगा और इसका सीधा असर रोजगार और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में कपास उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और इनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था वस्त्र उद्योग से गहराई से जुड़ी है। पार्टी का कहना है कि किसी भी बड़े आयात झटके से इन राज्यों में किसानों और छोटे उद्योगों की आय पर व्यापक असर पड़ सकता है। सुरजेवाला ने कहा कि विशेषज्ञ बताते हैं कि विदेशी कृषि उत्पाद आयात करने और इसके बढ़ने से घरेलू कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक है और इससे निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है। इससे किसानों और मिल मालिकों को खरबों रुपये की आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। यह पूछने पर कि अमेरिका के साथ इस समझौते से किसानों को कितना नुकसान हो सकता है, श्री सुरजेवाला ने कहा कि यह मामला आंकड़ों का नहीं बल्कि देश के किसानों के हित का है जिसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार किसानों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है लेकिन देती नहीं है।

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