Vivek Tankha withdraws defamation case: विवेक तन्खा के मानहानि का मामला वापस लेने के बाद शिवराज सिंह चौहान की याचिका का निपटारा!

Wed, Feb 04 , 2026, 07:40 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से दायर उस याचिका का निस्तारण कर दिया जिसमें कांग्रेस सांसद एवं वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने उनके खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के मामले को रद्द करने की मांग की थी, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौता हो गया था।

न्यायामूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने तन्खा के मानहानि की कार्यवाही वापस लेने के फैसले को रिकॉर्ड किया और उसी के अनुसार न्यायालय में लंबित मामले को बंद कर दिया। चौहान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने बेंच को समझौते के बारे में सूचित करते हुए बताया कि दोनों पक्ष संसद में मिले थे और सौहार्दपूर्ण तरीके से विवाद सुलझा लिया था। 

उन्होंने कहा कि तन्खा मानहानि के लिए दायर दीवानी मुकदमे और चौहान के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत दोनों को वापस लेने पर सहमत हो गए हैं। मानहानि के मामले दिसंबर 2021 में चौहान और अन्य लोगों द्वारा मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण से संबंधित शीर्ष न्यायालय में चल रही कार्यवाही के संबंध में दिए गए कथित बयानों से जुड़े थे, जिसमें तन्खा वकील के तौर पर पेश हुए थे। 

तन्खा ने आरोप लगाया था कि उन्हें गलत तरीके से ओबीसी आरक्षण का विरोधी बताया गया था। इससे पहले, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश की गई सामग्री को अस्वीकार्य मानकर खारिज करने का यह उचित चरण नहीं है।

न्यायालय ने आगे कहा था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के अपवादों की प्रयोज्यता, जिसमें सद्भावना और सार्वजनिक हित से संबंधित अपवाद शामिल हैं, केवल सुनवाई के दौरान ही निर्धारित की जा सकती है। न्यायालय ने यह भी कहा था कि सबूतों की पर्याप्तता और स्वीकार्यता, जिसमें मीडिया रिपोर्टों पर निर्भरता भी शामिल है, ऐसे मामले हैं जिनकी जांच सुनवाई के दौरान की जानी चाहिए, और संज्ञान लेने के चरण में, मजिस्ट्रेट को केवल यह आकलन करने की आवश्यकता होती है कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

शीर्ष न्यायलय ने 11 नवंबर, 2024 को चौहान को आपराधिक मानहानि मामले में मजिस्ट्रेट की ओर से जारी जमानती वारंट के बाद पेश होने से छूट दी थी - बशर्ते वह कार्यवाही में भाग लें। अदालत ने चौहान की उस याचिका पर भी नोटिस जारी किया था जिसमें मध्य प्रदेश उच्च न्यालय द्वारा शिकायत का संज्ञान लेने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करने से इनकार करने को चुनौती दी गई थी।

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