Ganeshji Anecdote part 1: गणेश जी का नाम कैसे पड़ा गजानन? जानिए उनके गजमुख के रहस्य का पहला पहलु!

Wed, Feb 04 , 2026, 09:30 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Ganeshji Anecdote: गणेश जी का गजमुख (हाथी का सिर) धारण करना मात्र एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि गहरे दार्शनिक और आध्यात्मिक रहस्यों का प्रतीक है। इसके पीछे मुख्य कारण गजमुखासुर नामक राक्षस का वध और सर्वोच्च बुद्धि (विघ्नहर्ता) का प्रतिनिधित्व करना है, जो इंसान को विनम्रता, चतुरता और शक्ति का संतुलन सिखाता है। 

गणेश जी के गजमुख का रहस्य:
गजासुर वध
: गजासुर नामक असुर शिव भक्त था। उसे वरदान मिला था। गणेश जी ने उसका वध कर उसे मुक्ति प्रदान की और उसके हाथी के सिर को धारण किया, जिससे उन्हें 'गजानन' नाम मिला।

प्रतीकात्मक अर्थ: हाथी को अत्यंत बुद्धिमान और धैर्यवान प्राणी माना जाता है। गजमुख इस बात का प्रतीक है कि शक्ति और बुद्धि के मिलन से ही विघ्नों का नाश संभव है।

बड़ी सूंड का रहस्य: यह सूक्ष्म और स्थूल बुद्धि को दर्शाता है, जिससे वे निर्णय लेने में निपुण होते हैं।

सुपार्श्व कान: यह संकेत देते हैं कि उन्हें सब कुछ सुनने की क्षमता है, लेकिन वे केवल सार्थक बातों को ही महत्व देते हैं (बुरा न सुनें, बुरा न देखें, बुरा न बोलें का सिद्धांत)।

विवेक का प्रतीक: हाथी बिना भटकाव के अपनी मस्ती में चलता है, जो जीवन में स्थिरता और एकाग्रता सिखाता है। 

संक्षेप में, गजमुख रूप भगवान गणेश को चतुरता, ज्ञान और शारीरिक शक्ति का सर्वोच्च अवतार बनाता है।

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