Indian Products: अमेरिका में चीन, ब्राजील, वियतनाम के मुकाबले भारतीय उत्पादों पर लगेगा कम आयात शुल्क

Tue, Feb 03 , 2026, 09:57 PM

Source : Uni India

नयी दिल्ली।अमेरिका के साथ व्यापार समझौते (trade agreement) में भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किये जाने से भारत चीन, ब्राजील और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में लाभ की स्थिति में होगा। भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) की अनुसंधान इकाई एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अमेरिका में सबसे कम आयात शुल्क वाले देशों की सूची में शामिल हो जायेगा। ब्राजील और कनाडा पर जहां अमेरिका ने 50-50 प्रतिशत आयात शुल्क लगा रखा है, वहीं दक्षिण अफ्रीका और म्यांमार पर 40-40 प्रतिशत आयात शुल्क हैं। यहां तक कि अमेरिका के बड़े व्यापार साझेदार वियतनाम पर भी 20 प्रतिशत आयात शुल्क है।

भारत से कम आयात शुल्क वाले देश जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ तथा स्विटजरलैंड (15-15 प्रतिशत) और ब्रिटेन (10 प्रतिशत) हैं। अन्य सभी बड़े देशों पर 18 प्रतिशत से अधिक आयात शुल्क है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समझौते से भारतीय रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, कपड़ा, रसायन, समुद्री आहार और इंजीनियरिंग उत्पादों के उद्योग को सबसे अधिक लाभ होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सोमवार रात टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान दोनों देशों में व्यापार समझौते को लेकर सहमति बनी। श्री ट्रंप ने बताया कि भारत रूस से कच्चे तेल का आयात बंद कर देगा और अमेरिका या वेनेजुएला से खरीद बढ़ायेगा।इसके साथ ही अमेरिका उत्पादों पर जवाबी आयात शुल्क शून्य करेगा। बदले में अमेरिका भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।

इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़कर 86.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया था और मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में गत दिसंबर 65.9 अरब डॉलर का निर्यात किया जा चुका है। भारतीय निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। एसबीआई रिसर्च का कहना है कि भारत ने पिछले 10 साल में औसतन 63.7 करोड़ टन दूध का सालाना उत्पादन किया है। इसमें पिछले साल 67.43 करोड़ टन का उत्पादन किया गया। इस क्षेत्र की वृद्धि की रफ्तार को बनाये रखने के लिए इस क्षेत्र का संरक्षण जरूरी है। 

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने अपने ऊर्जा हितों के संरक्षण के लिए यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान रूस से 60 डॉलर प्रति बैरल की ऊपरी सीमा के साथ कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था। वित्त वर्ष 2022-23 में रूस भारत को कच्चा तेल बेचने वाला इराक के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया। वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अब तक रूस पहले नंबर पर है। भारत फिलहाल अपने कुल कच्चा तेल आयात का एक-तिहाई रूस से खरीदता है। इराक 17 प्रतिशत के साथ दूसरे और सऊदी अरब 13 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। संयुक्त अरब अमीरात (11 प्रतिशत) और अमेरिका (आठ प्रतिशत) के साथ चौथे स्थान पर है। इसमें कहा गया है कि भारत यदि वेनेजुएला से तेल खरीदता है, जिसकी ओर राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इशारा किया है, तो भारी तेल पर मिलने वाली छूट के कारण भारत को कीमत के मामले में नुकसान नहीं होगा।

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