FTA with EU: ईयू के साथ एफटीए से भारतीय निर्यात बनेगा प्रतिस्पर्धी: उद्योग संगठन

Tue, Jan 27 , 2026, 08:49 PM

Source : Uni India

नयी दिल्ली। देश के उद्योग संगठनों ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मंगलवार को मुक्त व्यापार संधि (FTA) की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इससे निर्यात ज्यादा प्रतिस्पर्धी होगा और विकसित भारत के निर्माण में मदद मिलेगी। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता देश की वैश्विक व्यापार भागीदारी में एक रणनीतिक सफलता का प्रतीक है और दो प्रमुख लोकतांत्रिक देशों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी को और मजबूत बनाता है। दोनों मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हैं।

उन्होंने यूरोपीय बाजार में भारतीय निर्यात के 99 प्रतिशत से अधिक हिस्से के लिए वरीयता के आधार पर प्रवेश की छूट को भारतीय उद्योग के लिए बाजी पलटने वाला मौका बताया और कहा कि यह यूरोपीय संघ के उच्च-मूल्य वाले बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता को निर्णायक रूप से बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता सतत, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विकास की नींव रखता है जो भारत के "विकसित भारत, 2047" के दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा, "यह (समझौता) गहन आर्थिक सहयोग के नये द्वार खोलता है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार संधि व्यापार और निवेश के अपार अवसरों को खोलने के लिए तैयार है, जिससे व्यापक बाजार पहुंच, मजबूत मूल्य श्रृंखला एकीकरण और विनिर्माण एवं उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।"

उद्योग संगठन एसोचैम के अध्यक्ष और यूनो मिंडा के चेयरमैन निर्मल कुमार मिंडा ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए पर सहमति केंद्रीय बजट 2026-27 से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण समय पर हुई है और यह 2047 तक विकसित भारत के लिए सरकार के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है। समझौते को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण मील के पत्थरों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें व्यापार को गति देने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण को मजबूत करने की क्षमता है। पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं महासचिव रणजीत मेहता ने कहा कि शुल्क में कमी, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेत मान्यता के संयोजन से भारत की स्थिति एक ऐसे देश के रूप में फिर से स्थापित होगी जो केवल मात्रा के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने की बजाय मूल्य निर्माता के रूप में उभरेगा।

भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात प्रोत्साहन परिषद के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि भारत-ईयू समझौते से अभियांत्रिकी उत्पादों का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़कर 20-21 अरब डॉलर से बढ़कर 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यूरोपीय देशों में अभियांत्रिकी उत्पादों का निर्यात सबसे अधिक है। भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक एवं अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल ने कहा, "भारत-ईयू एफटीए बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में विश्वास, स्थिरता और दीर्घकालिक साझेदारी का सशक्त संदेश देता है। मुझे विश्वास है कि यह एफटीए विशेष रूप से डिजिटल अवसंरचना, अंतरिक्ष कनेक्टिविटी और सुरक्षित नेटवर्क के क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलेगा, जिससे यूरोपीय निवेशकों को वैश्विक बाजारों के लिए भारत के साथ नवाचार और विस्तार करने का आकर्षक अवसर मिलेगा। यह समझौता एयरटेल जैसी भारतीय कंपनियों के लिए भी यूरोप में डिजिटल अवसंरचना में निवेश के अवसर खोलता है।"

साख निर्धारक एजेंसी केयरएज रेजिंग्स ने कहा कि भारत वर्तमान में यूरोपीय संघ को 4.5 अरब से पांच अरब डॉलर मूल्य के रेडीमेड कपड़ों का निर्यात करता है और यूरोपीय संघ के रेडीमेड कपड़ों के बाजार में इसकी हिस्सेदारी लगभग पांच प्रतिशत है। इसलिए, भारतीय रेडीमेड कपड़ों के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अत्यंत महत्वपूर्ण है। साल 2027 तक इसके लागू होने पर भारत को चीन की तुलना में 12 प्रतिशत का शुल्क लाभ प्राप्त होगा, जिसकी वर्तमान में यूरोपीय संघ के रेडीमेड कपड़ों के आयात में लगभग 30 प्रतिशत की सबसे बड़ी बाजार हिस्सेदारी है।"

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