जालंधर। राष्ट्रीय संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (Communicable Disease Control Programme) के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित (Naresh Purohit) ने गुरुवार को यहां कहा कि इंदौर में सीवेज और पीने के पानी के जानलेवा मिश्रण ने देश को हिला दिया है और भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है। जाने-माने महामारी विशेषज्ञ (epidemiologist) डॉ नरेश पुरोहित के अनुसार, पानी में मिलावट की इस त्रासदी ने सतह के नीचे गंभीर कमियों को उजागर किया है, खासकर सीवरेज सुरक्षा, पाइपलाइन की निगरानी और आधिकारिक समन्वय में। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी सिर्फ़ दूषित पानी के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी सरकार के बारे में है जिसने सच्चाई का सामना करने के बजाय उसे छिपाने का फैसला किया, क्योंकि जांच में नागरिक बुनियादी ढांचे में चौंकाने वाली कमियां सामने आयी हैं।
डॉ पुरोहित ने कहा कि मौके पर निरीक्षण के दौरान भागीरथपुरा में मुख्य जल आपूर्ति में एक जगह लीकेज पाया गया, जिसके ऊपर एक शौचालय बना हुआ था, जिसमें अनिवार्य सेफ्टी टैंक नहीं था, यह एक ऐसा उल्लंघन था, जिसके कारण सीवेज पीने के पानी के नेटवर्क में रिस गया, इसलिए संभवतः इसी वजह से पानी दूषित हो गया। इसने प्रशासनिक विफलताओं और नागरिक कमियों की एक श्रृंखला को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि इस समय इंदौर के अस्पतालों में 100 से ज़्यादा मरीज़ उल्टी, दस्त और गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित भर्ती हैं, जिनमें से 13 लोगों की मौत हो गयी है और 26 लोग गहन चिकित्सा में हैं। उन्होंने कहा, "यह शहर घर-घर कचरा इकट्ठा करने, सख्त अलगाव और कूड़ा न फैलाने के अभियानों के लिए जाना जाता है, लेकिन वर्तमान जानलेवा घटना यह सवाल उठाती है कि क्या दिखाई देने वाली सफ़ाई ने पीने के पानी की बुनियादी सुरक्षा को नज़रअंदाज़ कर दिया है।"



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Thu, Jan 01 , 2026, 08:42 PM