वडोदरा। पश्चिम रेलवे (Western Railway) ने रेल परिचालन में संरक्षा को और मजबूत करते हुए सोमवार को को वडोदरा - नागदा सेक्शन पर कवच 4.0 प्रणाली को लागू कर दिया। पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार (Pradeep Kumar) द्वारा वडोदरा स्टेशन (Kavach system) से कवच से लैस (सुसज्जित) विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी से साथ ही मुंबई - नयी दिल्ली मुख्य मार्ग के पश्चिम रेलवे के निर्धारित 693 रुट किलोमीटर में से 559.5 रुट किलोमीटर पर यानी अधिकतम मार्क पर यह प्रणाली को स्थापित हो गयी है। कुमार ने इस अवसर पर बताया कि वडोदरा - नागदा सेक्शन के अंतर्गत वडोदरा से मंगल महुडी सेक्शन (122.5 आरकेएम) और पंचपिपलिया - नागदा (102.01 आरकेएम) खंड के बीच में यानी कुल 224.51आरकेएम मार्ग पर कवच प्रणाली को आज लागू किया गया। मंगल महुडी से पंचपिपलिया के बीच इस प्रणाली को स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है और जल्द ही इसे स्वचालित सिगनलिंग के साथ पूरा कर लिया जायेगा। रेलवे द्वारा इस वित्तीय वर्ष 2025 -26 में कुल 659.5 आरकेएम मार्ग पर कवच प्रणाली स्थापित की गयी है। वडोदरा मंडल द्वारा इससे पहले जनवरी में वडोदरा - विरार सेक्शन पर कवच प्रणाली चालू की गयी थी और आज वडोदरा से गोधरा होते हुए नागदा तक इसे लागू किया गया है।
गौरतलब है कि कवच एक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है और यह मानवीय गलतियों के जोखिम को कम करने के लिए ट्रेन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत है। जो कि मानवीय त्रुटि के कारण 'खतरे के संकेत को पार करना' (एसपीएडी) से होने वाले परिणामों को रोकती है। रेलवे के मुताबिक वडोदरा–नागदा सेक्शन पर इस जटिल कार्य के निष्पादन के प्रत्येक स्टेशन तथा प्रत्येक एब्सोल्यूट/ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सेक्शन के लिए पृथक योजना तैयार की गई, पटरियों पर 6000 से अधिक स्थानों पर आरफिल्ड टैग का प्रोग्रामिंग और स्थापना कार्य किया गया, 26 स्टेशनों, 13 मध्य-खंडों तथा लोकोमोटिव के बीच सतत रेडियो संचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, प्रत्येक स्टेशन पर कुल 39 रेडियो संचार टावर एवं आवश्यक उपकरण स्थापित किए गए, पूरे मार्ग पर अप और डाउन दोनों दिशाओं में लगभग 600 किमी लंबाई की ओएफसी केबल बिछाई गई, साथ ही प्रत्येक स्टेशन, मध्य-खंड तथा एलसी गेट पर आधुनिक 'कवच' उपकरण स्थापित कर उन्हें मौजूदा सिग्नलिंग प्रणाली से एकीकृत किया गया, लोकोमोटिव में भी 'कवच' उपकरण लगाए गए तथा अंततः संपूर्ण प्रणाली का सफलतापूर्वक ट्रायल एवं परीक्षण किया गया।
'कवच' प्रणाली अपने यूरोपीय समकक्षों (ईटीसीएस) की तुलना में बहुत सस्ती है। अभी तक डब्ल्यूएपी-7, डब्ल्यूएजी9, डब्ल्यूएप5 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली लगाई गयी है। जल्द ही, इसे दूसरे लोकोमोटिव पर भी शुरू किया जाएगा। अब तक पश्चिम रेलवे पर कुल 364 लोकोमोटिव में 'कवच' प्रणाली लगाई जा चुकी है। रेलवे ने कहा है कि पश्चिम रेलवे आधुनिक एवं स्वदेशी तकनीकों को अपनाकर सुरक्षित, दक्ष एवं भविष्य उन्मुख रेल नेटवर्क के निर्माण हेतु निरंतर प्रतिबद्ध है।



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