सिलीगुड़ी। मालदा उत्तर की पूर्व सांसद मौसम नूर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly) से पहले मालतीपुर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में अपनी नयी राजनीतिक यात्रा शुरू कर दी है। वे अब घर-घर जाकर मतदाताओं से समर्थन मांग रही हैं। सुश्री नूर के नामांकन ने मालतीपुर को वीआईपी (VIP status) दर्जा दिला दिया है, जिससे यहाँ एक हाई-वोल्टेज मुकाबले की जमीन तैयार हो गई है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इस घोषणा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और विशेष रूप से दिग्गज नेता दिवंगत एबीए गनी खान चौधरी के समर्थकों में नयी ऊर्जा भर दी है। श्री गनी खान चौधरी, जो सुश्री मौसम नूर के मामा थे, आज भी मालदा के लोगों के बीच स्थानीय लोगों को रोजगार देने और जिले में बड़े पैमाने पर विकास कार्य करने के लिए बेहद सम्मानित हैं।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने अभी से समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि सुश्री नूर की उम्मीदवारी कांग्रेस को उस क्षेत्र में अपनी खोयी जमीन वापस पाने में मदद करेगी, जिसे कभी पार्टी का गढ़ माना जाता था। 2021 के विधानसभा चुनावों में, तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के इस गढ़ में अपना दबदबा बनाया था और मालदा की 12 में से आठ सीटों पर जीत हासिल की थी। उस समय कांग्रेस और माकपा दोनों ही अपना खाता खोलने में विफल रहे थे। दूसरी ओर भाजपा ने इंग्लिश बाजार सहित चार सीटें सुरक्षित की थीं, जो जिले में बदलते राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाता है।
अपनी मां रूबी नूर के निधन के बाद सुश्री मौसम नूर ने अपने परिवार के गढ़ सुजापुर से विधायक के रूप में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था। मालदा उत्तर से दो बार सांसद रहीं सुश्री नूर अब राज्य की राजनीति में अपना आधार फिर से स्थापित करना चाहती हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का सुझाव है कि मालतीपुर से चुनाव लड़ने का उनका फैसला 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सोची-समझी रणनीति है। हालांकि उनकी उम्मीदवारी ने तीव्र राजनीतिक अटकलों को भी जन्म दे दिया है। हाल ही में एक जनसभा में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने मौजूदा तृणमूल कांग्रेस विधायक और जिला अध्यक्ष अब्दुर रहीम बक्शी को खुली चुनौती दी, जो सुश्री नूर के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। मुस्लिम बहुल इस सीट पर भाजपा की सीमित संभावनाओं को स्वीकार करते हुए श्री अधिकारी ने दावा किया था कि वे बक्शी की हार सुनिश्चित करने के लिए 'कुछ करेंगे'।
उल्लेखनीय है कि सुश्री मौसम नूर तृणमूल कांग्रेस में रहने के बाद हाल ही में कांग्रेस में वापस आयी हैं। उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव तृणमूल के टिकट पर लड़ा था, लेकिन भाजपा उम्मीदवार खगेन मुर्मू से हार गयी थीं। इसके बाद तृणमूल ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। मालदा में भाजपा सूत्रों के अनुसार, उनका व्यापक उद्देश्य जिले में तृणमूल की सीटों की संख्या कम करना है। एक स्थानीय भाजपा नेता ने कहा, "अगर सुश्री मौसम नूर मालतीपुर से चुनाव लड़ती हैं, तो यह श्री अब्दुर रहीम बक्शी के लिए मुकाबला बेहद कठिन बना देगा।" कांग्रेस के भीतर सुश्री नूर की उम्मीदवारी ने कुछ हलचल पैदा की थी। शुरुआत में वे सुजापुर लौटने पर विचार कर रही थीं, लेकिन स्थानीय भावनाओं के कारण उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी गयी। अंततः उन्होंने मालतीपुर को चुना और इस सीट के एक अन्य दावेदार पूर्व विधायक अल-बेरुनी का समर्थन हासिल करने में सफल रहीं।
पार्टी सूत्रों का संकेत है कि दोनों के बीच एक अनौपचारिक समझौता हुआ है। सुश्री नूर 2029 के संसदीय चुनावों पर ध्यान केंद्रित करेंगी, जबकि अल-बेरुनी को भविष्य में इस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की उम्मीद है। परिसीमन के बाद बनी नयी निर्वाचन सीट मालतीपुर ने अब तक उतार-चढ़ाव भरी राजनीतिक किस्मत देखी है। श्री बक्शी ने पहली बार 2011 में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के टिकट पर यह सीट जीती थी, जबकि 2016 में अल-बेरुनी ने कांग्रेस के लिए इसे सुरक्षित किया। तृणमूल कांग्रेस ने 2021 में 50.1 प्रतिशत वोट शेयर के साथ इस सीट पर फिर से कब्जा जमाया था।



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