मुंबई: पश्चिम एशिया संकट और रुपये में जारी तेज गिरावट के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में अब तक इक्विटी में 1.13 लाख करोड़ से अधिक की शुद्ध बिकवाली की है। शुद्ध बिकवाली उनके द्वारा लगायी गयी पूंजी और निकाली गयी पूंजी का अंतर है। केंद्रीय डिपॉजिटरी सेवा कंपनी सीडीएसएल के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने भारतीय बाजार में इक्विटी में अपना निवेश मार्च में 1,13,810 करोड़ रुपये घटाया है जिसका असर शेयर बाजारों पर साफ दिख रहा है।
इससे पहले कभी एक ही महीने में इक्विटी में एफपीआई निवेश में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट नहीं दर्ज की गयी है। मार्च में अब सिर्फ एक कारोबारी दिवस बचा है और यह नकारात्मक रिकॉर्ड बनना तय है। डेट में उनकी शुद्ध बिकवाली 9,687 करोड़ रुपये और म्यूचुअल फंड में 2,637 करोड़ रुपये रही। हाइब्रिड उपकरणों में उन्होंने कुल 1,852 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। इक्विटी, डेट, म्यूचुअल फंड और हाइब्रिड उपकरण मिलाकर मार्च में अबतक भारतीय पूंजी बाजार में एफपीआई की कुल शुद्ध निकासी 1,24,281 करोड़ रुपये रही है और इस मामले में भी रिकॉर्ड टूटना तय है।
कोरोना काल में मार्च 2020 के बाद यह पहला मौका है जब एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध निकासी की है। मार्च 2020 में जब पहली बार लॉकडाउन लगा था तब एफपीआई ने 1,18,203 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। इस मामले में भी नया रिकॉर्ड बनना लगभग तय है। इससे पहले, फरवरी में एफपीआई का शुद्ध निवेश 37,847 करोड़ रुपये धनात्कम रहा था जबकि जनवरी में वे शुद्ध रूप से बिकवाल रहे थे।



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