Eknath Shinde and Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स (Maharashtra Politics) में इस बात की खूब चर्चा है कि दोनों शिवसेनाएं एक-दूसरे की मदद के लिए साथ आएंगी। राज्य की पॉलिटिक्स (state politics) में यह अनोखा डेवलपमेंट, यानी ठाकरे और शिंदे का हाथ मिलाना, केंद्र और राज्य दोनों पार्टियों के लिए अहम बताया जा रहा है। आइए इस आर्टिकल के ज़रिए समझते हैं कि उद्धव ठाकरे और डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच असल में क्या डील होने की उम्मीद है...
शिंदे की शिवसेना क्या चाहती है?
एकनाथ शिंदे की शिवसेना के MP और एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे (Shrikant Shinde) को केंद्र में मंत्री पद मिलने की संभावना है। हालांकि, शिवसेना केंद्र में एक नहीं बल्कि दो मंत्री पद की उम्मीद कर रही है। श्रीकांत शिंदे के साथ-साथ शिंदे की शिवसेना श्रीरंग बारणे के लिए भी केंद्र में मंत्री पद चाहती है। यही वजह है कि शिंदे के नेता दिल्ली में घूम रहे हैं।
इसमें ठाकरे की पार्टी क्या करेगी?
शिंदे की पार्टी को केंद्र में BJP लीडरशिप को यह साबित करना होगा कि उसे सपोर्ट करने वाले MPs की संख्या सिर्फ़ पार्टी के MPs ही नहीं, बल्कि दूसरे MPs भी हैं। इसीलिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना उद्धव ठाकरे के MPs से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रही है। ऐसा MPs की संख्या बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। शिवसेना MPs की संख्या बढ़ाने और केंद्र में एक्स्ट्रा मिनिस्टर पोस्ट पाने की कोशिश कर रही है। इसीलिए ठाकरे की शिवसेना केंद्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना से सहयोग की उम्मीद कर रही है।
ठाकरे को बदले में क्या मिलेगा?
अगर उद्धव ठाकरे की शिवसेना केंद्र में मिनिस्टर पोस्ट के लिए उनकी मदद करती है, तो शिंदे की शिवसेना लेजिस्लेटिव काउंसिल में उद्धव ठाकरे की मदद कर सकती है। शिंदे की शिवसेना इस बारे में पहले ही हिंट दे चुकी है। एकनाथ शिंदे के गढ़ ठाणे शहर से शिवसेना MP नरेश म्हास्के ने उद्धव ठाकरे का ज़िक्र करते हुए कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री की पार्टी को हमारी मदद की ज़रूरत हो सकती है। म्हास्के ने अपील की है, 'अगर उद्धव ठाकरे को लेजिस्लेटिव काउंसिल में मदद चाहिए, तो उन्हें एकनाथ शिंदे से कॉन्टैक्ट करना चाहिए।' म्हास्के ने कहा है, 'शिंदे ठाकरे की वैसे ही मदद कर सकते हैं जैसे उन्होंने शरद पवार की राज्यसभा के लिए की थी। लेकिन पहले उन्हें शिंदे साहेब को फोन करना चाहिए।'
ठाकरे की वैसे ही मदद करने का ऑफर जैसे उन्होंने पवार की मदद की थी
नरेश म्हास्के ने कहा है, "शिंदे ने दूसरा कैंडिडेट नहीं दिया। सुप्रिया सुले ने शरद पवार को राज्यसभा भेजने के लिए एकनाथ शिंदे को फोन किया था।" इसका जिक्र करते हुए नरेश म्हास्के ने कहा है, "अगर उद्धव ठाकरे को लेजिस्लेटिव काउंसिल में मदद चाहिए, तो उन्हें एकनाथ शिंदे से कॉन्टैक्ट करना चाहिए। शिंदे का दिल बड़ा है। लेकिन ठाकरे को पहले फोन करना चाहिए।"
शिवसेना की दोनों पार्टियों के बीच कानूनी लड़ाई अपने आखिरी स्टेज में है। जहां दोनों शिवसेना पार्टियां एक-दूसरे से समझौता करने की तैयारी कर रही हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट अगले कुछ हफ्तों में शिवसेना पार्टी और पार्टी सिंबल से जुड़े केस का फैसला कर सकता है, जो ढाई साल से भी ज्यादा समय से चल रहा है। 12 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने सुनवाई हुई और उद्धव गुट के साथ कपिल सिब्बल और शिंदे गुट ने कहा कि वे फाइनल बहस के लिए तैयार हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों की लिखी हुई दलीलें पढ़ीं और उपलब्धता के हिसाब से अगली तारीख देने का फैसला किया है। फाइनल बहस लगभग पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने अभी अगली तारीख की घोषणा नहीं की है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इस बारे में फाइनल सुनवाई अप्रैल या मई में शुरू होगी।



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Wed, Mar 18 , 2026, 02:42 PM