Harish Rana Euthanasia: हरीश राणा की पानी की सप्लाई भी बंद , ऑक्सीजन सपोर्ट हटाया गया; अब पल्स रेट पर फोकस

Tue, Mar 17 , 2026, 03:50 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Harish Rana : हरीश राणा का 13 साल पहले एक एक्सीडेंट हुआ था और उसके बाद उनकी ज़िंदगी मानो रुक सी गई थी। 2013 के बाद उनकी ज़िंदगी में दर्द के अलावा कुछ नहीं है। शरीर तो ज़िंदा है, लेकिन दिमाग़ चुप है। वह बोल नहीं सकते और उन्हें कोई उम्मीद नहीं है। इस बीच, पिछले हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद, उनकी आख़िरी यात्रा की तैयारी शुरू हो गई है। हरीश को दिल्ली के AIIMS अस्पताल (AIIMS Hospital in Delhi) में भर्ती कराया गया है और यूथेनेशिया के तहत उनके सभी सपोर्ट सिस्टम धीरे-धीरे हटा दिए गए हैं। उनका परिवार उनके साथ है और यह उनके लिए मुश्किल समय है। लेकिन माता-पिता के पास अपने प्यारे बेटे को अलविदा कहने का ही एक ही रास्ता बचा है। हरीश की पीने के पानी की सप्लाई भी आज से बंद कर दी जाएगी।

आज अस्पताल में क्या होगा?
दिल्ली के AIIMS अस्पताल में भर्ती हरीश राणा की पीने के पानी की सप्लाई भी बंद कर दी जाएगी। उन्हें कोई ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया जा रहा है। पहले उन्हें ट्यूब के ज़रिए खाना दिया जा रहा था और अब वह भी बंद कर दिया गया है। आज हरीश की पानी की सप्लाई बंद होने के बाद, ट्यूब पर एक कैप लगा दी जाएगी। इसका मतलब है कि ट्यूब को हटाया नहीं जाएगा।

यूथेनेशिया प्रोसेस में कितने दिन लगेंगे?
31 साल के हरीश राणा अभी AIIMS में हैं। AIIMS-दिल्ली ने हरीश राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया (passive euthanasia) की इजाज़त देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए प्रोटोकॉल शुरू कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोसेस में लगभग दो से तीन हफ़्ते लगेंगे। भारत में पहली बार, एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन डिपार्टमेंट की प्रोफेसर और हेड डॉ. सीमा मिश्रा की लीडरशिप में एक स्पेशल मेडिकल टीम बनाई गई है। टीम में न्यूरोसर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन, और साइकेट्री डिपार्टमेंट के डॉक्टर शामिल हैं।

इज्ज़त के साथ आज़ाद
हरीश राणा की माँ को आज भी वे दिन याद हैं जब उनका बेटा हरीश बहुत मज़बूत और खुश था। सिर्फ़ 20 साल की उम्र में, उसने एक शानदार फिज़ीक बना ली थी और इतना हैंडसम था कि हर कोई उसकी तारीफ़ करता था। लेकिन अब उसका समय आ गया है। मां निर्मला देवी कहती हैं, "बेटा, तुम सम्मान के साथ मुक्ति के रास्ते पर चल रहे हो। तुम्हारा आगे का सफर खुशहाल हो।"

पिता की आंखों में बेबसी और उदासी थी
सोशल एक्टिविस्ट दीपांशु मित्तल याद करते हैं कि करीब ढाई साल पहले हरीश के पिता उनसे मिले थे। उस समय उनकी आंखों में बेबसी साफ दिख रही थी। उन्होंने कहा कि बेटे के इलाज की वजह से परिवार की आर्थिक हालत खराब हो गई थी और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करें।

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