Kangana Ranaut on Periods: कंगना रनौत (Kangana Ranaut) अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं। वह हमेशा अपने अनुभवों की कहानी खुलकर बताती हैं, चाहे वह पर्सनल हो या प्रोफेशनल (personal or professional)। वह अक्सर अपने बेबाक बयानों की वजह से विवादों में रहती हैं, लेकिन इस बार उन्होंने अपने बचपन और टीनएज के अनुभवों के बारे में बात की। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने पहले पीरियड्स के अनुभव का ज़िक्र किया, और इसके ज़रिए बताया कि समाज में क्या गलतफहमियां, डर और भावनाएं हैं। (Kangana Discusses Periods)

कंगना ने बताया कि उन्हें दूसरी लड़कियों के मुकाबले पीरियड्स देर से शुरू हुए थे। वह नौवीं क्लास में पहुंच गई थीं, लेकिन उनकी क्लास की लगभग सभी लड़कियों को पहले ही पीरियड्स शुरू हो चुके थे। यह उनकी मां के लिए भी चिंता की बात थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनकी बेटी को कोई प्रॉब्लम है। टीनएज लड़कियों (teenage girls) के लिए यह सिचुएशन नैचुरल है, लेकिन समाज में टैबू और गलतफहमियों की वजह से यह कंगना के लिए ज़्यादा चिंता की बात बन गई।

बचपन में कंगना गुड़ियों से खेलती थीं और उनकी माँ इस बात पर गुस्सा करती थीं। एक बार तो उन्हें बहुत गुस्सा आया और उन्होंने कंगना की गुड़ियाँ फेंक दीं। कंगना को याद आया कि उनकी माँ ने कहा था कि गुड़ियों से खेलने से उनके पीरियड्स देर से आएंगे। यह सुनकर वह हैरान रह गईं, क्योंकि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उस समय टीनएज लड़कियों में वहम होना आम बात थी क्योंकि समाज में पीरियड्स को लेकर खुलकर बात नहीं होती थी और कई गलतफहमियाँ फैली हुई थीं।

कंगना ने बताया कि जब उन्हें आखिरकार पीरियड्स आए, तो यह उनके लिए बहुत ही चौंकाने वाला और डरावना अनुभव था। जब वह सुबह उठीं, तो उन्होंने पाया कि उनकी बेडशीट पूरी तरह खून से सनी हुई थी। उनके मन में कई सवाल उठे, क्या हुआ, अब क्या करें, और क्या इस वजह से उनके पापा उनसे प्यार नहीं करेंगे? वह डर गईं और खूब रोईं। उनके लिए यह मानना मुश्किल था कि अब उन्हें हर महीने यह अनुभव करना होगा। यह डर और परेशानी समाज के कई हिस्सों में आज भी मौजूद टैबू की वजह से और बढ़ गई।

कंगना का कहना है कि समाज को पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करना सीखना चाहिए। गलत जानकारी लड़कियों में डर पैदा करती है, और इससे उनका कॉन्फिडेंस भी कम होता है। वह इस बात पर ज़ोर देती हैं कि जब हम इस टॉपिक पर खुलकर बात करते हैं, तो लड़कियों को सही जानकारी मिलती है और वे इस नेचुरल प्रोसेस को समझ सकती हैं। आज भी कई लड़कियों को इस अनदेखी और गलतफहमी का सामना करना पड़ता है, यही वजह है कि कंगना इस अनुभव के बारे में बात करने से नहीं कतरातीं।

उन्होंने कहा कि पीरियड्स हर लड़की के लिए एक नेचुरल प्रोसेस है और इससे डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। घर पर सही गाइडेंस और सपोर्ट से लड़कियां इस अनुभव के ज़रिए डर को कॉन्फिडेंस से बदल सकती हैं। कंगना रनौत के अनुभव से ही समाज पीरियड्स के बारे में खुली चर्चा की ज़रूरत और इस प्रोसेस की सही समझ बनाने के महत्व को समझता है।



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Sat, Apr 04 , 2026, 01:57 PM