Lord Shiva's Jyotirlinga: भगवान शिव का ये मंदिर 'ॐ' के आकार का है; जानिए मंदिर की पौराणिक कथा और मान्यताएँ!

Mon, Feb 16 , 2026, 09:32 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Omkareshwar Jyotirlinga: यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगओं में से एक है , सदियों पहले भील जनजाति ने इस जगह पर लोगो की बस्तियां बसाई और अब यह जगह अपनी भव्यता और इतिहास से प्रसिद्ध है। यह यहां के मोरटक्का गांव से लगभग (14 कि॰मी॰) दूर बसा है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच मन्धाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह द्वीप पवित्र चिन्ह 'ॐ' के आकार का है। यहाँ ओंकारेश्वर (मान्धाता) और ममलेश्वर (अमलेश्वर) दो प्रमुख मंदिर हैं, जिन्हें मिलाकर एक ही ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और अध्यात्म के लिए प्रसिद्ध है। 

मुख्य विवरण: 
* स्थान: मन्धाता, खंडवा जिला, मध्य प्रदेश (इंदौर से लगभग 77 किमी दूर)। 
* नदी: नर्मदा नदी। 
* आकार: द्वीप 'ॐ' (ओम्) के आकार का है। 
* विशेषता: ओंकारेश्वर और ममलेश्वर दोनों का समान महत्व है। 

पौराणिक कथा और महत्व: 
* ओंकारेश्वर मंदिर की कहानी: 
राजा मांधाता एक प्रतापी चक्रवर्ती सम्राट थे, जिन्होंने सांसारिक वैभव के बजाय अध्यात्म और शिव की साधना को अपनाया। राजा मांधाता ने मुख्य रूप से भगवान शिव को प्रसन्न करने, आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने और अपना राज्य समृद्ध बनाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने नर्मदा के तट पर ओंकारेश्वर में तपस्या की थी। उन्होंने अजेय बनने और अपनी प्रजा की भलाई के लिए शिव जी से वरदान प्राप्त किया था। राजा मांधाता ने भगवान शिव की कठिन तपस्या कर वरदान प्राप्त किया। 

उन्होंने भगवान शिव से अटूट शक्ति प्राप्त की, जिससे वे अजेय बन गए और रावण जैसी शक्तियों को भी हराने में सक्षम हुए। मान्यता है कि उन्होंने ही उस पर्वत पर तपस्या की और शिवलिंग की स्थापना की जो ओंकारेश्वर तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 12 वर्षों के सूखे के समय उन्होंने अपने तपोबल से वर्षा करवाई, जो उनकी तपस्या का प्रभाव था। 

* शिव-पार्वती का निवास: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती रात में यहाँ विश्राम करते हैं। 
* महत्व: यहाँ के पवित्र जल में स्नान करना और शिवलिंग का दर्शन करना, मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है।

दर्शन और यात्रा की जानकारी: 
* समय: मंदिर सुबह 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है, लेकिन आरती और श्रृंगार के समय दर्शन बंद हो सकते हैं। 
* ओंकारेश्वर मंदिर दर्शन: साधारण दर्शन में 1-2 घंटे लगते हैं, जबकि वीआईपी दर्शन में 30-45 मिनट। 
* पहुंचने का साधन: इंदौर निकटतम हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन है, यहाँ से बस या टैक्सी ली जा सकती है। 
* अन्य दर्शनीय स्थल: मन्धाता पर्वत पर आदि शंकराचार्य गुफा, काजलीगढ़ किला, और सिद्धनाथ मंदिर। 

यात्रा का सबसे अच्छा समय: 
* जुलाई से मार्च (सावन के महीने में विशेष भीड़ होती है)। 

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की मुख्य विशेषताएं:
* ॐ आकार का द्वीप: नर्मदा नदी के बीच बसा यह टापू प्राकृतिक रूप से हिंदू धर्म के पवित्र प्रतीक 'ॐ' (ओम) का आकार लेता है।
* स्वयंभू ज्योतिर्लिंग: ओंकारेश्वर में मुख्य मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है, जिसे काफी छोटा और प्राकृतिक माना जाता है।
* दो मुख्य मंदिर (ओंकारेश्वर-ममलेश्वर): मुख्य ओंकारेश्वर मंदिर के साथ-साथ नर्मदा नदी के दूसरे तट पर ममलेश्वर (अमलेश्वर) ज्योतिर्लिंग स्थित है, जो दोनों मिलाकर एक ही ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजे जाते हैं।
* शयन आरती की परंपरा: मान्यता है कि भगवान शिव प्रतिदिन शाम को तीनों लोकों की यात्रा के बाद शयन (विश्राम) करने के लिए यहाँ आते हैं, इसलिए यहाँ की 'शयन आरती' बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
* नर्मदा स्नान का महत्व: इस मंदिर के पास नर्मदा नदी में स्नान करना अत्यंत पवित्र माना जाता है, जो गंगा या जमुना में स्नान के समान पुण्य फल देता है।
* वास्तुकला: यह मंदिर पेशवा वास्तुकला शैली का बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें सुंदर नक्काशी और भव्य शिखर हैं। 

यह स्थान आध्यात्मिक रूप से बहुत समृद्ध है और इसे शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ज्यादा पूजनीय माना जाता है।

 

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