New CPI Series: नयी सीपीआई सीरीज से बेहतर होगा मॉनेटरी, फिस्कल पॉलिसी के फैसलों का कैलिब्रेशन!

Fri, Feb 13 , 2026, 08:37 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

मुंबई: चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज मॉनेटरी और फिस्कल पॉलिसी बनाने में इस्तेमाल होने वाले डेटा की क्वालिटी को बेहतर बनाएगी, क्योंकि यह मौजूदा कंजम्पशन पैटर्न और इकोनॉमिक हालात को बेहतर ढंग से दिखाता है।

मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) के तहत नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) ने बेस 2024=100 के साथ नई CPI सीरीज़ जारी की, जिसमें बास्केट को बढ़ाकर ज़्यादा सामान और सर्विस शामिल किए गए, जबकि उन चीज़ों को हटा दिया गया जिनका अब ज़्यादा इस्तेमाल नहीं होता। आइटम ग्रुप के वेट को भी हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे (HCES) 2023-24 के आधार पर रीकैलिब्रेट किया गया है।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, नागेश्वरन ने नई CPI सीरीज़ पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपोर्टर्स से कहा, "क्योंकि CPI बास्केट अब हाल के खर्च के डेटा के साथ अलाइन हो गया है, इसलिए इससे मिलने वाले महंगाई के सिग्नल आर्थिक हालात से ज़्यादा करीब से मेल खाएंगे। इससे मॉनेटरी और फिस्कल पॉलिसी को कैलिब्रेट करने के लिए जानकारी का आधार बेहतर होता है।"

उन्होंने कहा कि नई सीरीज़, जिसमें सर्विसेज़ और डिजिटल मार्केट का ज़्यादा कवरेज है, पॉलिसी बनाने वालों को असली इनकम, कंजम्पशन ट्रेंड्स और खरीदने की ताकत का अंदाज़ा लगाने के लिए ज़्यादा अपडेटेड आधार देती है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया अपने दो महीने में होने वाले मॉनेटरी पॉलिसी फैसलों में रिटेल महंगाई को भी शामिल करता है।

नागेश्वरन ने कहा कि अगर CPI में उतार-चढ़ाव कम होता है, तो फिस्कल खर्च, DA फिक्सेशन और इंडेक्स-लिंक्ड बॉन्ड, जो CPI से जुड़े हैं, ज़्यादा स्टेबल, अंदाज़ा लगाने लायक और भरोसेमंद हो जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि फ़ूड बास्केट का वज़न CPI 2012 में 45.86 से घटकर नई सीरीज़ में 36.75 हो गया है, जो कुछ हद तक कुछ चीज़ों को रेस्टोरेंट और सर्विसेज़ जैसी दूसरी कैटेगरी में रीएलोकेशन दिखाता है।

उन्होंने कहा, "मैक्रो लेवल पर, यह हेल्थ, एजुकेशन, मोबिलिटी और कनेक्टिविटी पर खर्च के बढ़ते डायवर्सिफिकेशन को दिखाता है, जिसकी आप एक ऐसी इकॉनमी से उम्मीद करेंगे जिसमें इनकम बढ़ रही हो और लिविंग स्टैंडर्ड बेहतर हो रहा हो।" नागेश्वरन ने कहा कि वैसे वोलाटाइल फूड और बेवरेज ग्रुप के लिए कम वेटेज भी हेडलाइन इन्फ्लेशन को कम वोलाटाइल बना सकता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह का रीबैलेंसिंग आमतौर पर इनकम ग्रोथ, प्रोडक्टिविटी गेन और लिविंग स्टैंडर्ड में सुधार से जुड़ा होता है। रिवाइज्ड बास्केट ओवरऑल कंजम्प्शन में सर्विसेज़ की बढ़ती भूमिका को भी दिखाता है। उन्होंने कहा, "यह कंजम्प्शन मेज़रमेंट को आउटपुट और एम्प्लॉयमेंट के डेवलप हो रहे स्ट्रक्चर के करीब लाता है, जहाँ सर्विसेज़ इकॉनमिक एक्टिविटी का बढ़ता हिस्सा हैं।"

उन्होंने कहा कि नई सीरीज़ प्राइस फॉर्मेशन में डिजिटल चैनल्स की बढ़ती भूमिका को भी पहचानती है और स्टेट, सबक्लास और आइटम लेवल पर अर्बन और रूरल इन्फ्लेशन ट्रेंड्स को बेहतर ढंग से पहचानने में मदद करेगी। नागेश्वरन ने आगे कहा कि नई CPI सीरीज़, आने वाले GDP और इंडेक्स ऑफ़ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) बेस रिविज़न के साथ, इंडिया के स्टैटिस्टिकल फ्रेमवर्क को ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के साथ अलाइन करेगी।

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