Hanumanji Anecdote: हनुमान जी को अखंड बाल ब्रह्मचारी मुख्य रूप से उनके भगवान राम के प्रति पूर्ण समर्पण और अपनी इंद्रियों पर अद्वितीय नियंत्रण के कारण माना जाता है। इसके पीछे के प्रमुख कारण और पौराणिक मान्यताएं निम्नलिखित हैं:
राम भक्ति में समर्पण: हनुमान जी ने अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम की सेवा और भक्ति के लिए समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि गृहस्थ जीवन (शादी-शुदा जीवन) की जिम्मेदारियां और सांसारिक बंधन उनकी इस सेवा और भक्ति में बाधा बन सकते हैं。
इंद्रियों पर नियंत्रण: ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल अविवाहित रहना नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं और भावनाओं पर पूर्ण विजय पाना भी है। हनुमान जी ने अपनी शक्ति और मन को पूरी तरह वश में कर रखा था, जिससे वे असीमित शक्ति और सिद्धियां प्राप्त कर सके।
माता अंजनी का वचन: एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, उनकी माता अंजनी ने उनसे वचन लिया था कि वे आजीवन ब्रह्मचारी रहकर धर्म की सेवा करेंगे。
विवाह की विशेष कथा
कुछ ग्रंथों (जैसे पाराशर संहिता) में उनके विवाह का उल्लेख मिलता है, लेकिन फिर भी उन्हें ब्रह्मचारी ही माना जाता है क्योंकि:
शिक्षा पूर्ण करने के लिए: हनुमान जी सूर्य देव से 9 विद्याएं सीख रहे थे। उनमें से 4 विद्याएं केवल विवाहित व्यक्ति ही सीख सकता था। अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए सूर्य देव के सुझाव पर उन्होंने सूर्य की पुत्री सुवर्चला से विवाह किया।
गृहस्थ सुख का त्याग: विवाह केवल एक धार्मिक औपचारिकता थी ताकि वे अपनी शिक्षा पूर्ण कर सकें। विवाह के तुरंत बाद सुवर्चला अपनी तपस्या में लौट गईं और हनुमान जी ने कभी वैवाहिक या सांसारिक सुख का अनुभव नहीं किया, इसलिए उनका ब्रह्मचर्य अखंड रहा।
इसी कारण, आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में एक ऐसा मंदिर भी है जहां हनुमान जी अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान हैं।



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