नयी दिल्ली। बैंकों ने रिजर्व बैंक (Reserve Bank) की शुक्रवार को घोषित नीतिगत समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों को पहले के स्तर पर बनाये रखने और नीतिगत रुख को तटस्थ रखने के फैसले को अनुमान के अनुसार बताया है और तरलता के स्तर को पर्याप्त रखने के गवर्नर के बयान को वृद्धि के लिए सहायक बताया है। बैंकों का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक द्वारा सरकार के लिए जुटाये जाने वाले उधार में शुद्ध रूप से मामूली वृद्धि होगी। बैंकों का कहना है कि हाल में प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौते से आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में 0.20 से 0.30 प्रतिशत तक की वृद्धि किये जाने की संभावना है।
बैंकिंग क्षेत्र का सुझाव है कि डॉलर के 90 रुपये से नीचे आने पर आरबीआई के लिए इसकी पुन: खरीद का एक बेहतर विकल्प उपलब्ध होगा। इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने कहा कि आरबीआई का फैसला वर्तमान वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के बीच एक संतुलित सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "इंडियन ओवरसीज बैंक आरबीआई के इस रुख को स्वस्थ आर्थिक वृद्धि के लिए सहायक मानता है।" एचडीएफसी बैंक ने एक नोट में कहा कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपनी प्रेस वार्ता में दोहराया है कि केंद्र सरकार के लोखा-जोखा और विदेशी मुद्रा बाजार हेजिंग के परिचालनों में बदलावों को देखते हुए केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी (बैंकिंग तंत्र में धन की उपलब्धता) को पर्याप्त स्तर पर बनाये रखेगा ताकि बॉन्ड (यील्ड) और कॉल मनी मार्केट आदि सभी बाजारों में मौद्रिक नीति के प्रभावों को प्रसार हो सके।
आरबीआई गवर्नर ने जोर दिया कि कर्ज के लिए धन का प्रवाह अर्थव्यवस्था के उत्पादक कार्यों की जरूरतों के हिसाब से होगा। एचडीएफसी बैंक का कहना है कि बैंकों के पास तरलता की कमी से आरबीआई की नीतिगत दरों में पिछली कटौती का बाजार में प्रसार अधूरा रहा है। बैंक ने यह भी कहा कि इस समय बैंकों में ऋण के लिए धन की पर्याप्त उपलब्धता है, इसलिए चालू वित्त वर्ष की वर्तमान चौथी तिमाही में आरबीआई की ओर से धन का प्रवाह बढ़ाने के किसी और उपाय की उम्मीद नहीं है। बैंक के अनुसार, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में अब तक खुले बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद, रुपया/डॉलर खरीद-बिक्री स्वैप और आरक्षित नकदी अनुपात (CEO) की कटौती आदि को मिलाकर बैंकिंग प्रणाली में 13 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाली है।
एचडीएफसी का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में आरबीआई को कुल मिलाकर बैंकों के लिए चार-पांच लाख करोड़ रुपये की तरलता उपलब्ध करानी पड़ सकती है। बैंक का अनुमान है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ हाल में घोषित व्यापार समझौतों के मद्देनजर 6.9 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 0.20-0.30 प्रतिशत तक ऊपर किया जा सकता है। एचडीएफसी को निकट भविष्य में डॉलर के 90-91 रुपये के दायरे में रहने की उम्मीद है। इस समय यह 90.75 रुपये के आसपास है। बैंक का यह भी अनुमान है कि आने वाली तिमाही में 10 वर्ष की मियाद वाले सरकारी बांड पर निवेश प्रतिफल (बॉन्ड यील्ड) 6.65-6.80 प्रतिशत के दायरे में रहेगा। आज ऐसे बॉन्ड पर यील्ड 6.713 प्रतिशत के आसपास था है जबकि गुरुवार को बाजार बंद होने के समय यील्ड 6.65 प्रतिशत था, क्योंकि आरबीआई ने नीतिगत वक्तव्य में तरलता के लिए कोई बड़ा उपाय घोषित नहीं किया है।
एसबीआई रिसर्च की इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति के अनुमान मुख्य रूप से कीमती धातुओं में तेजी के चलते है। आरबीआई ने 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 2.1 प्रतिशत रखा है, लेकिन चौथी तिमाही के अनुमान को 3.2 प्रतिशत कर दिया है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई गवर्नर ने अपने वक्तव्य में जोर दिया है कि अगले वित्त वर्ष में केंद्रीय बैंक की शुद्ध उधारी में मुश्किल से ही कोई बढ़ोतरी होगी। यह वह संकेतक है जिसे बॉन्ड बाजार को देखना चाहिये।
विश्लेषण में कहा गया है कि 2006-07 में केंद्र सरकार की शुद्ध उधारी 1.4 लाख करोड़ रुपये थी और स्थिरता के साथ 2007-08 में 1.5 लाख करोड़ रुपये रही। वर्ष 2008-09 में यह 50 प्रतिशत बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपये हो गई। तब से यह धीरे-धीरे बढ़कर 2012- 13 में 4.7 लाख करोड़ रुपये हो गयी। हालांकि, इसके बाद इसमें गिरावट आई और 2016-17 में यह 3.5 लाख करोड़ रुपये हो गयी। वित्त वर्ष 2020- 21 में महामारी के कारण यह बढ़कर 11.4 लाख करोड़ रुपये हो गयी। अगले वित्त वर्ष में हल्की बढ़कर 11.7 लाख करोड़ रुपये तक रहने का अनुमान है। एसबीआई रिसर्च का कहना है कि बाजार को उम्मीद थी कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों के विकास ऋण प्रतिभूति (State Development Loan) मार्केट में कुछ सुधार किये जाएंगे। आरबीआई ने इस बात पर जोर दिया है कि एक बार बायबैक की घोषणा होने के बाद कुल उधारी कम हो जायेगी। रिपोर्ट में सिफारिश की गयी है कि घरेलू मुद्रा की विनिमय दर 90 रुपये प्रति डॉलर से मजबूत हो जाये तो आरबीआई के लिए डॉलर फिर से खरीदने का एक बेहतर विकल्प मिल सकता है।



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