Magical Breathing Technique: आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में स्ट्रेस और चिंता आम बात हो गई है। ऐसे समय में, ऋषियों द्वारा बताया गया 'सावित्री प्राणायाम' मन को स्थिरता देने का एक बेहतरीन उपाय है। इसे 'रिदमिक ब्रीदिंग' भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें सांस लेने की रफ़्तार एक खास रिदम में होती है।
सावित्री प्राणायाम क्या है?
यह प्राणायाम मुख्य रूप से सांस अंदर लेने (पूरक), सांस रोकने (कुंभक), सांस छोड़ने (रेचक) और सांस को फिर से रोकने (बाह्य कुंभक) की रिदम पर आधारित है। इसमें सांस लेने की दर 2:1:2:1 के अनुपात में रखी जाती है।
सावित्री प्राणायाम करने का तरीका:
1. पोजीशन: सुखासन या पद्मासन में ज़मीन पर सीधे बैठ जाएँ। अपनी आँखें बंद करें और अपने शरीर को आराम दें।
2. सांस अंदर लें (पूरक): 6 सेकंड तक गिनते हुए धीरे-धीरे गहरी सांस लें।
3. सांस अंदर लें (अंतकुंभक): सांस अंदर लेने के बाद 3 सेकंड तक सांस को अपने फेफड़ों में रोकें।
4. सांस बाहर छोड़ें (रेचक): फिर से 6 सेकंड तक गिनते हुए धीरे-धीरे नाक से सांस बाहर छोड़ें।
5. बाहर रोकें (बाह्यकुंभक): सांस बाहर छोड़ने के बाद 3 सेकंड तक सांस बाहर रोकें।
ध्यान दें: अगर 6 सेकंड तक नहीं कर सकते, तो शुरू में रेश्यो 4:2:4:2 रखें।
इस प्राणायाम के फायदे:
मानसिक शांति: यह प्राणायाम दिमाग को शांत करता है, जिससे गुस्सा, चिंता और तनाव कम होता है।
कॉन्सेंट्रेशन बढ़ाता है: रिदमिक सांस लेने से मन भटकता नहीं है और आपको काम पर फोकस करने में मदद मिलती है।
ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है: शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रोसेस बेहतर होता है।
नींद न आने की समस्या से राहत: सोने से पहले यह प्राणायाम करने से शांति और गहरी नींद आती है।
दिल के लिए फायदेमंद: यह दिल की धड़कन को कंट्रोल करता है और ब्लड प्रेशर (BP) को कंट्रोल में रखता है।



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Tue, Feb 03 , 2026, 10:15 AM