Acharya Chanakya: आचार्य चाणक्य एक महान विचारक, अर्थशास्त्री और कूटनीतिज्ञ थे। चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति (Chanakya Niti) नाम की किताब में कई ऐसी बातें बताई हैं, जो आज भी हमें रास्ता दिखा रही हैं। चाणक्य कहते हैं कि जैसे इंसान के बाहर दुश्मन होते हैं, और इंसान को ऐसे दुश्मनों से खतरा रहता है, वैसे ही उसके अंदर भी कई दुश्मन होते हैं। हम बाहरी दुश्मनों को आसानी से पहचान सकते हैं, इसलिए हम उनसे सावधान रहते हैं, लेकिन आप अपने अंदर के दुश्मनों को कभी नहीं जान पाते, इसलिए ऐसे दुश्मन आपको बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। जैसे, आलस, आलस इंसान का बहुत बड़ा दुश्मन है। क्योंकि इस दुनिया में मेहनत के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है, मेहनत करने पर ही पैसा मिलेगा, और पैसा होने पर ही दुनिया में इज्जत और सम्मान मिलेगा। हालांकि, जो आलसी होता है, उसे भविष्य में बहुत नुकसान होता है। चाणक्य ने कहा है कि जैसे आलस इंसान का दुश्मन (Enemies) है, वैसे ही अहंकार भी है, आइए जानते हैं कि चाणक्य (Chanakya) ने असल में इसके बारे में क्या कहा है।
चाणक्य कहते हैं कि अहंकार जितना बड़ा कोई दुश्मन नहीं है, जब आपके मन में अहंकार पैदा होता है, तो आपकी तरक्की के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। क्योंकि जब आपके मन में अहंकार पैदा होता है, तो आप खुद को सब कुछ जानने वाला समझने लगते हैं। इसलिए, आप कभी कुछ नया नहीं सीखते। नतीजतन, आप दुनिया में पिछड़ जाते हैं। इससे आपको भविष्य में बहुत नुकसान होता है, चाणक्य कहते हैं।
चाणक्य आगे कहते हैं कि जब आपके मन में अहंकार पैदा होता है, तो आप दूसरों को अपने से कम समझने लगते हैं, खुद को बेहतर समझने लगते हैं। इसलिए, ऐसी स्थिति में आपके दोस्त, शुभचिंतक, रिश्तेदार आपसे दूरी बना लेते हैं। चाणक्य कहते हैं कि भविष्य में आपको इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। चाणक्य ने यह भी कहा है कि जब आपके अंदर अहंकार पैदा होता है, तो आप साफ सोचने की क्षमता खो देते हैं, अक्सर गलत फैसले लेते हैं, और इसका असर भविष्य में आप पर पड़ता है।



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