Ganeshji Anecdote: गणेशजी और चंद्रमा की पौराणिक कथा उनके अहंकार के नाश और विनम्रता के महत्व को दर्शाती है। एक बार गणेशजी (गजमुख) मूषक पर सवार होकर जा रहे थे, तब चंद्रमा ने उनके रूप का उपहास किया। क्रोधित होकर गणेशजी ने उन्हें श्राप दिया कि वे गायब हो जाएंगे (या अपनी चमक खो देंगे)। क्षमा मांगने पर, चंद्रमा को श्राप से मुक्ति के लिए हर महीने घटने-बढ़ने (कृष्ण पक्ष/शुक्ल पक्ष) का दंड मिला।
कथा के मुख्य बिंदु:
उपहास: एक बार गणेश जी बहुत सारे मोदक खाकर अपने वाहन मूषक (चूहे) पर जा रहे थे। पेट बहुत भारी होने के कारण मूषक लड़खड़ा गया और गणेश जी जमीन पर गिर पड़े, जिससे उनका पेट फट गया और मोदक बिखर गए।
अहंकार: चंद्रमा को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था, इसलिए उन्होंने गणेश जी के हाथी के मुख और बड़े पेट पर हँसकर मज़ाक उड़ाया।
गणेशजी का श्राप: गणेशजी ने क्रोधित होकर चंद्रमा को श्राप दिया कि उनकी चमक खत्म हो जाएगी और जो भी गणेश चतुर्थी के दिन उन्हें देखेगा, उस पर झूठा कलंक लगेगा।
श्राप का निवारण: चंद्रमा के माफी मांगने पर, गणेशजी ने कहा कि वे पूरी तरह से अपना प्रकाश नहीं खोएंगे, बल्कि हर महीने घटेंगे (कृष्ण पक्ष) और फिर बढ़ेंगे (शुक्ल पक्ष)।
सीख: यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें कभी भी अपने रूप या संपत्ति पर घमंड नहीं करना चाहिए और न ही किसी दूसरे का मज़ाक उड़ाना चाहिए। इस पौराणिक घटना के कारण ही गणेश चतुर्थी की रात को चंद्रमा देखना वर्जित माना जाता है।



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Wed, Jan 28 , 2026, 09:46 AM