Chanakya Niti: मौत से भी ज़्यादा दर्दनाक है बेइज्जती; बेइज्जती से बचने के लिए चाणक्य नीति के प्रैक्टिकल टिप्स!

Tue, Jan 27 , 2026, 09:40 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Chanakya Niti: ज़िंदगी में कुछ अनुभव इतने गहरे होते हैं कि वे शरीर की मौत से भी ज़्यादा दर्दनाक होते हैं। चाणक्य नीति कहती है कि बेइज्जती या आत्म-सम्मान का नुकसान एक ऐसा दर्द है जो हर दिन नया होता है। मौत एक पल का दर्द है, लेकिन सम्मान का नुकसान ज़िंदगी भर हर दिन दुख देता है। चाणक्य की यह सोच इंसान के मन को गहराई से छूती है। चाणक्य नीति इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए प्रैक्टिकल गाइडेंस देती है।

बेइज्जती मौत से ज़्यादा दर्दनाक क्यों है?
मौत ही एकमात्र ऐसी घटना है जिसे समय के साथ भुलाया जा सकता है। लेकिन, बेइज्जती का घाव रह जाता है। यह बार-बार याद आता है, समाज की नज़रों में, लोगों की बातों से और खुद के दिल में हीनता की भावना पैदा होती है। इससे आत्मविश्वास कम होता है, जीने की इच्छा खत्म हो जाती है। चाणक्य कहते हैं कि इंसान की असली दौलत उसका सम्मान है। जब यह चला जाता है, तो इंसान की ताकत और मोटिवेशन कमज़ोर हो जाता है। इसलिए, बेइज्जती से बचना ही ज़िंदगी का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।

ऐसी स्थिति के क्या कारण हैं?
बेइज्जती कई तरह की होती है – समाज में नीचा दिखाना, काम की जगह पर बेइज्जती वाला बर्ताव, परिवार में नज़रअंदाज़ या धोखा। चाणक्य नीति में ऐसी छोटी-छोटी बातें बताई गई हैं जिनसे इज़्ज़त खराब हो सकती है। जैसे, अपनी कमज़ोरी दिखाना, गलत समय पर गुस्सा दिखाना, ज़्यादा बोलना या बहुत ज़्यादा शब्दों का इस्तेमाल करना। चाणक्य का मानना ​​है कि इंसान का अपना ईगो और बिना कंट्रोल वाली वाणी ही बेइज्जती की मुख्य वजहें हैं। जब कोई इंसान अपनी बात साबित करने में लग जाता है या बहुत ज़्यादा बोलता है, तो वह अपनी ही इज़्ज़त को खतरे में डालता है।

बेइज्जती से बचने के लिए चाणक्य नीति के प्रैक्टिकल टिप्स
पहला
, “अल्पाक्षरं शाश्वतं यत्” – कम बोलें, लेकिन जो कहें वह सच्चा और असरदार हो। अगर शब्द कम, लेकिन साफ़ और मज़बूत हों, तो इज़्ज़त बढ़ती है। 
दूसरा, “कभी भी कमज़ोरी न दिखाएँ।” चाणक्य कहते हैं कि दुश्मन को कमज़ोरी दिखाना खुद की बेइज्जती है। 
तीसरा, इंसान को विनम्र होना चाहिए, लेकिन कमज़ोर नहीं दिखना चाहिए। विनम्रता से सम्मान मिलता है, जबकि कमजोरी अपमान को न्योता देती है। 
चौथा, अपनी बातों में पक्के रहें, लेकिन जिद्दी नहीं। जब आप अपनी बातों में पक्के होते हैं, तो लोग आपका सम्मान करते हैं।

अपमान होने पर ये करें
चाणक्य नीति निराश होने के बजाय सीखने का रास्ता दिखाती है। सबसे पहले, शांत रहें और अपने मन में घटना को दोहराने से बचें। बीती बातों को छोड़कर भविष्य पर ध्यान दें। अपनी कमियों को पहचानें और सुधार करें। अपमान करने वाले से दूर रहें। जो आपका सम्मान नहीं करते, उनसे रिश्ता तोड़ दें। अपने काम और चरित्र को इतना मजबूत बनाएं कि कोई दोबारा आपका अपमान न कर सके।

जीवन में सबसे बड़ा संकट सम्मान खोना है। इसलिए, व्यक्ति को अपनी वाणी, व्यवहार और चरित्र पर नियंत्रण रखना चाहिए। कम बोलना, विनम्र रहना और कमजोर न होना इसके मूल मंत्र हैं। जब आत्म-सम्मान मजबूत होगा, तो हर चुनौती आसान लगेगी। अपमान से बचना ही जीवन का मूल मंत्र है।

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