Tried to persuade Zelensky: मोदी ने की ज़ेलेन्स्की को मनाने की कोशिश, मदद की पेशकश भी कीे!

Fri, Aug 23 , 2024, 09:02 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

कीव. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर ज़ेलेन्स्की (Ukraine Volodymyr Zelensky) से आग्रह किया कि वह शांति की खातिर बिना समय बरबाद किये इस संकट से निकलने के लिए बातचीत एवं कूटनीति के मार्ग पर आगे आयें और इसके लिए भारत सक्रिय भूमिका निभाने और वह स्वयं व्यक्तिगत रूप में योगदान देने के लिए तैयार हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और यूक्रेनी राष्ट्रपति श्री ज़ेलेंस्की ने कीव के मरिंस्की पैलेस में एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक की और वे दोनों देशों के बीच कृषि, औषधि, सांस्कृतिक आदान प्रदान एवं सामुदायिक विकास के चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान का गवाह बने। मोदी ने आज यूक्रेन सरकार को चार ‘भीष्म सहयोग, हित और मैत्री के लिए भारत स्वास्थ्य पहल क्यूब्स’ की सौगात दी। ‘भीष्म क्यूब’ में सभी प्रकार की चोटों और चिकित्सा से जुड़ी हालत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) या देखभाल सुनिश्चित करने वाली दवाइयां और उपकरण शामिल हैं। इसमें बुनियादी ऑपरेशन कक्ष के लिए सर्जिकल उपकरण भी शामिल हैं जो प्रति दिन 10-15 बुनियादी सर्जरी सुनिश्चित कर सकते हैं।

‘भीष्म क्यूब’ में तरह-तरह की आपातकालीन चिकित्सीय हालत जैसे कि आघात लगने, रक्तस्राव होने, जल जाने, फ्रैक्चर होने, इत्‍यादि के लगभग 200 मरीजों का इलाज करने की क्षमता है। इसमें सीमित मात्रा में अपनी जरूरत की बिजली और ऑक्सीजन भी उत्‍पन्‍न हो सकती है। यूक्रेन की चिकित्सा टीम (Ukrainian medical team)को ‘भीष्म क्यूब’ (Bhishma Cube)के संचालन का प्रारंभिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए अनेक भारतीय विशेषज्ञों की एक टीम तैनात की गई है।

श्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से बातचीत की शुरूआत करते हुए संघर्ष के बीच यूक्रेन में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने में मदद के लिए श्री ज़ेलेन्स्की का आभार जताया। श्री मोदी ने कहा, “जब युद्ध के शुरुआती दिन थे तो आपने भारतीय नागरिकों और छात्रों को निकालने में मदद की। संकट के इस समय में आपकी मदद के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं... दुनिया यह अच्छी तरह से जानती है कि इस दौरान युद्ध में हमने दो भूमिकाएँ निभाईं... पहली भूमिका थी मानवीय दृष्टिकोण की... मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मानवीय दृष्टिकोण से चाहे जो भी आवश्यकता हो, भारत हमेशा आपके साथ खड़ा रहेगा और दो कदम आगे रहेगा।”

श्री मोदी ने यूक्रेनी नेता से बातचीत में बहुत साफ शब्दों में शांति की ठोस पहल की और उनकी रूस यात्रा को लेकर श्री ज़ेलेन्स्की के मन में गलतफहमी को दूर करने की कोशिश की। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत संघर्ष के समय कभी भी तटस्थ नहीं रहा और वह हमेशा शांति के पक्ष में खड़ा रहा है। अन्य देशों के लोग भी जानते हैं कि भारत ने सक्रिय रूप से शांति प्रयासों की योजना बनाई है और आप भी जानते हैं कि हमारा दृष्टिकोण जन-केंद्रित रहा है। मैं आपको और पूरी दुनिया को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह भारत की प्रतिबद्धता है और हम मानते हैं संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और हम इसका समर्थन करते हैं। कुछ समय पहले, जब मैं इसके पक्ष में रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन (President Vladimir Putin) से मिला था, तो मैंने उनसे कहा था कि यह युद्ध का समय नहीं है।

एक बैठक के लिए रूस की यात्रा पर मास्को में, मैंने वहां भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी समस्या का समाधान कभी भी युद्ध के मैदान पर नहीं होता है, समाधान केवल बातचीत, संवाद और कूटनीति के माध्यम से होता है और हमें बिना समय बर्बाद किये उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए पक्षों को एक साथ बैठना चाहिए और इस संकट से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने चाहिए।” मोदी ने कहा, “आज मैं आपके साथ शांति और प्रगति के रास्ते पर विशेष रूप से चर्चा करना चाहता हूं, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत शांति के हर प्रयास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यदि मैं व्यक्तिगत रूप से इसमें योगदान दे सकता हूं, तो मैं ऐसा करना चाहूंगा। एक मित्र के रूप में, मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूँ।”

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर (Foreign Minister Dr. S Jaishankar) ने श्री मोदी की यूक्रेन यात्रा के निष्कर्षों की जानकारी देते हुए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह कीव पहुंचे और अभी-अभी उनके आधिकारिक कार्यक्रम संपन्न हुए हैं। यह एक ऐतिहासिक यात्रा है। यह पहली बार है कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने 1992 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से यूक्रेन का दौरा किया है। प्रधानमंत्री सुबह एक विशेष ट्रेन से यहां पहुंचे और कीव रेलवे स्टेशन पर यूक्रेन के प्रथम उप विदेश मंत्री ने उनका स्वागत किया। उन्होंने भारतीय समुदाय से मुलाकात की।

आखिरी कार्यक्रम में कीव में स्कूल ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में हिन्दी भाषा सीख रहे यूक्रेनी छात्रों से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने छात्रों की मेधाविता और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देने में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने भारतीय संस्कृति और इतिहास को यूक्रेनी लोगों के करीब लाने के उनके प्रयासों की भी सराहना की।

विदेश मंत्री ने कहा, “चर्चा में, इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को समर्पित था। व्यापार, आर्थिक मुद्दे, रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, शिक्षा के बारे में चर्चा हुई। बहुत सारे मुद्दे थे। नेताओं ने अंतर सरकारी आयोग को भी काम सौंपा, जिसके मंत्री कुलेबा और मैं सह-अध्यक्ष हैं, विशेष रूप से हमारे व्यापार और आर्थिक संबंधों के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए, जो हाल के दिनों में खराब हो गए थे। और हम निश्चित रूप से इस वर्ष के अंत तक, निश्चित रूप से अंतर सरकारी आयोग की शीघ्र बैठक की आशा करते हैं।” उन्होंने बताया कि भारत ने आज यूक्रेन को चिकित्सा सहायता का भीष्म क्यूब, 22 टन दवाएं और 20 जेनसेट सौंपे।

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