Vastu Tips for Gudi Padwa: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि एक पवित्र दिन है, जब न केवल प्रकृति बदलती है, बल्कि नए साल (New Year) की शुरुआत भी होती है। महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों में इस दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर के आंगन में बनाई गई गुड़ी को नेगेटिविटी पर पॉजिटिविटी की जीत और आने वाले सुनहरे युग का प्रतीक माना जाता है। तो आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा पर गुड़ी लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
गुड़ी पड़वा कब मनाई जाएगी?
दृक पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे शुरू होगी और 20 मार्च को सुबह 4:52 बजे खत्म होगी। इसलिए, 2026 की गुड़ी पड़वा 19 मार्च को मनाई जाएगी।
गुड़ी पड़वा क्यों खास है?
गुड़ी पड़वा को नए साल की शुरुआत माना जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने दुनिया की रचना की थी। यह दिन जीवन में एक नई शुरुआत, आगे बढ़ने, पुराने दुखों को पीछे छोड़ने और सफलता के लिए कोशिश करने का प्रतीक है। घर के बाहर लगाई गई गुड़ी घर में सुख, शांति और खुशहाली का प्रतीक मानी जाती है।
घर के बाहर गुड़ी लगाने का महत्व
गुड़ी पड़वा के दिन घर के मेन गेट के पास या खिड़की के पास गुड़ी लगाई जाती है। गुड़ी को ऊंचा लगाना शुभ माना जाता है, ताकि वह दूर से दिखे और पॉजिटिव एनर्जी को खींचे। इस गुड़ी को बांस की डंडी पर साड़ी, तांबे के बर्तन और नीम के पत्तों से सजाया जाता है। इस सजावट को जीवन में खुशहाली और सेहत का प्रतीक माना जाता है।
इस दिशा में गलती से भी गुड़ी न लगाएं
धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, गुड़ी कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं लगानी चाहिए। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, जो नेगेटिव एनर्जी का प्रतीक है। इस दिशा में गुड़ी लगाने से घर में पॉजिटिविटी आने के बजाय रुकावटें और परेशानियां बढ़ सकती हैं।
कौन सी दिशा सही है?
गुड़ी को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा है और यह एनर्जी, रोशनी और नई शुरुआत का प्रतीक है। इसके विपरीत, उत्तर दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी है। इन दिशाओं में गुड़ी लगाने से घर में खुशी, सफलता और सौभाग्य आता है।
सजावट के सही नियम और तरीके
गुड़ी लगाने के लिए एक लंबी बांस की छड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। इस पर सुनहरे किनारे वाला पीले या नारंगी रंग का रेशमी कपड़ा बांधा जाता है। इस पर नीम के पत्तों और फूलों की माला बांधी जाती है। इस पर तांबे या चांदी का बर्तन उल्टा रखा जाता है। सबसे ज़रूरी बात, गुड़ी को कभी भी ज़मीन पर न रखें। इसके बजाय, गुड़ी को रखते समय ज़मीन पर चटाई बिछाएँ। गुड़ी को उठाते समय मन में खुशी का एहसास होना चाहिए। शाम को सूरज डूबने से पहले गुड़ी को आदर के साथ उतार लेना चाहिए।



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Wed, Mar 18 , 2026, 08:30 PM