healthy tips : आजकल, बिज़ी लाइफस्टाइल, (lifestyles) काम के बोझ या ट्रैवल की परेशानी की वजह से हम अक्सर पेशाब रोक लेते हैं। हालांकि यह पहली बार में नॉर्मल लग सकता है, लेकिन मेडिकल टर्म्स में इसे यूरिनरी रिटेंशन से जुड़ी एक सीरियस प्रॉब्लम माना जाता है। अगर शरीर में मौजूद एक्सक्रीटेड और टॉक्सिक सब्सटेंस को समय पर बाहर न निकाला जाए, तो इसका हमारे अंदरूनी अंगों पर सीधा और परमानेंट असर पड़ सकता है। आज हम जानेंगे कि पेशाब रोकने से शरीर में क्या बदलाव होते हैं और इसके आगे क्या रिस्क हो सकते हैं।
1. ब्लैडर की इलास्टिसिटी का खत्म होना
ब्लैडर एक फ्लेक्सिबल गुब्बारे जैसा होता है, जो पेशाब जमा होने पर फैलता है। हालांकि, बार-बार और लंबे समय तक पेशाब रोकने से ब्लैडर की मसल्स में बहुत ज़्यादा खिंचाव आ जाता है। यह समय के साथ ब्लैडर की सिकुड़ने की नेचुरल एबिलिटी को खत्म कर देता है। इस वजह से, ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता, जिसे मेडिकल टर्म्स में अंडरएक्टिव ब्लैडर कहा जाता है।
2. किडनी स्टोन और यूरिक एसिड का रिस्क
यूरिन में यूरिया, क्रिएटिनिन और अमोनिया जैसे नुकसानदायक वेस्ट प्रोडक्ट्स होते हैं। जब यूरिन शरीर में ज़्यादा समय तक जमा रहता है, तो उसके सॉल्ट क्रिस्टलाइज़ होने लगते हैं, जिससे किडनी स्टोन का खतरा 50 परसेंट तक बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, अगर यूरिन फ्लो का प्रेशर उल्टी दिशा में जाता है, तो किडनी फेलियर भी हो सकता है।
3. पेल्विक फ्लोर मसल्स का कमज़ोर होना
जिन मसल्स का इस्तेमाल हम यूरिन रोकने के लिए करते हैं, उन्हें पेल्विक फ्लोर मसल्स कहते हैं। लगातार प्रेशर पड़ने से ये मसल्स कमज़ोर हो जाती हैं। इससे आगे चलकर यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस हो जाता है। ऐसे में हंसते, खांसते या छींकते समय भी यूरिन लीक होने की संभावना रहती है।
4. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)
यूरिन में नैचुरली कुछ बैक्टीरिया होते हैं। अगर आप समय पर यूरिन करते हैं, तो ये बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकल जाते हैं। लेकिन, अगर यूरिन जमा हो जाता है, तो ये बैक्टीरिया ब्लैडर में तेज़ी से बढ़ते हैं। इससे इन्फेक्शन होता है। इससे यूरिन करते समय जलन, पेट दर्द, बुखार और यूरिन से बदबू जैसी समस्याएं होती हैं।
इसका ध्यान कैसे रखें?
जाने-माने एक्सपर्ट डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, एक हेल्दी इंसान को दिन में कम से कम 6 से 7 बार पेशाब करने की ज़रूरत होती है। पेशाब रोकने का मतलब है वेस्ट को शरीर में वापस रोकना। इससे न सिर्फ यूरिनरी ट्रैक्ट पर, बल्कि पूरे डाइजेस्टिव सिस्टम और ब्लड सर्कुलेशन पर भी ज़ोर पड़ता है। इसके लिए, दिन में 2-3 लीटर पानी पिएं, लेकिन एक बार में बहुत ज़्यादा पीने के बजाय इसे थोड़ी-थोड़ी देर में पीना फ़ायदेमंद होता है।
आप काम में कितने भी बिज़ी क्यों न हों, हर 3 से 4 घंटे में पेशाब करने की आदत डालें। अपनी पेल्विक मसल्स को मज़बूत करने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार कीगल एक्सरसाइज़ करें। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि इंफेक्शन से बचने के लिए पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करते समय सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें या पूरी साफ़-सफ़ाई रखें।



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Wed, Mar 11 , 2026, 08:36 PM