Shiva Jyotirlinga: केदारनाथ धाम उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय की गोद में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों, 4 धामों और 5 केदारों में से एक है। 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, यह मंदिर मंदाकिनी नदी के तट पर है, जो केवल अप्रैल/मई से नवंबर तक दर्शन के लिए खुलता है और पांडवों से जुड़ा है।
केदारनाथ के बारे में मुख्य जानकारी:
पौराणिक कथा: मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव को खोजा था। शिवजी ने बैल (नंदी) का रूप धारण किया था, और जब भीम ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, तो वे जमीन में विलीन हो गए। पीठ का हिस्सा केदारनाथ में स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रकट हुआ।
स्थापना: कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण पांडवों ने कराया था, और बाद में 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने इसका जीर्णोद्धार किया।
वास्तुकला: यह प्राचीन मंदिर कत्यूरी शैली में बना है, जो पत्थरों के विशाल शिलाखंडों से निर्मित है।
यात्रा का समय: मंदिर के कपाट हर साल अक्षय तृतीया के आस-पास (अप्रैल-मई) खुलते हैं और कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर-नवंबर) के आसपास बंद हो जाते हैं।
यात्रा मार्ग: गौरीकुंड से केदारनाथ तक लगभग 20-22 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई है, जिसके लिए हेलीकॉप्टर, घोड़े और पालकी की सुविधा भी उपलब्ध है।
अन्य दर्शनीय स्थल: मंदिर के पास आदि शंकराचार्य की समाधि, भीमशिला (2013 की आपदा में मंदिर की रक्षा करने वाली शिला) और भैरव बाबा का मंदिर है।
यात्रा और ठहरने के टिप्स:
पंजीकरण: केदारनाथ यात्रा के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण अनिवार्य है।
कहाँ रुकें: आप गौरीकुंड, सीतापुर या मंदिर के आसपास GMVM टेंट, प्राइवेट टेंट और होटलों में रुक सकते हैं।
क्या साथ रखें: भारी ठंड के कारण गर्म कपड़े अवश्य साथ रखें।
केदारनाथ की यात्रा शांति और दिव्य आस्था का अनुभव कराती है, जहाँ चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़ और मंदाकिनी नदी का मनोरम दृश्य होता है।



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