पुणे: जब देश के युवा 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे मना रहे थे, पुणे में स्कूली छात्रों ने इस अवसर को वातावरण जागरूकता को समर्पित करने का निर्णय लिया और डॉ. मोहन धारिया की 101वीं जयंती को 'वनराई पर्यावरण बालोत्सव' के भव्य आयोजन के साथ मनाया। रविवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, वनराई फाउंडेशन द्वारा आयोजित अंतर-विद्यालयीय पर्यावरण सांस्कृतिक महोत्सव का तिलक स्मारक मंदिर में जीवंत तरीके से समापन हुआ।
वनराई फाउंडेशन की शुरुआत 1986 में केंद्रीय मंत्री, वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मोहन धारिया ने ग्रामीण भारत में खराब हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी। वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिनमें प्रशंसित मराठी फिल्म 'नाल' के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता बाल कलाकार श्रीनिवास पोकले भी शामिल थे।
पहली बार, इस महोत्सव में पर्यावरण जागरूकता से जुड़े नियमित कार्यक्रमों के साथ-साथ नुक्कड़ नाटक और लोक कला प्रतियोगिताएं भी शामिल की गईं। कुल 70 स्कूलों ने इसमें हिस्सा लिया, जिनमें से 30 फाइनल राउंड में पहुंचे। दोनों श्रेणियों में शीर्ष तीन टीमों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। भारुद, पोवाड़ा, कीर्तन और पर्यावरण संबंधी गीतों जैसी पारंपरिक कला विधाओं के माध्यम से छात्रों ने रचनात्मक तरीके से संरक्षण एवं सतत जीवन शैली के संदेश दिए। विजेता टीमों ने जागरूकता अभियान को गांवों तक ले जाने और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को और अधिक फैलाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर डॉ. मोहन धारिया स्मृति पुरस्कार, अन्नासाहेब बेहेरे स्मृति पुरस्कार और तुलसाबाई सतारकर स्मृति पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम को इंदिरा बेहेरे चैरिटेबल ट्रस्ट और महाराष्ट्र फाउंडेशन, यूएसए का सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों में वनराई के ट्रस्टी रोहिदास मोरे और सागर धारिया, सचिव अमित वाडेकर, अकोला जिला प्रमुख बबनराव कनाकिर्ड, जनसेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ विनोद शाह और प्रोफेसर वसंत बंग शामिल थे।
सभा को संबोधित करते हुए सागर धारिया ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे युवा मन में पर्यावरणीय मूल्यों को विकसित करने में सक्रिय रूप से भाग लें और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने की दिशा में काम करें। अमित वाडेकर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2002 से, वनराई इको क्लब स्कूल स्तर पर विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर रहा है, जिनमें निबंध लेखन, चित्रकला, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं, कचरे से धन बनाने की परियोजनाएं, स्वच्छ विद्यालय अभियान, औषधीय पौधों के उद्यान, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पहल शामिल हैं।
आयोजकों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में कम उम्र से ही पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना और कर्मठ नागरिकों का पोषण करना है। यह महोत्सव छात्रों की रचनात्मकता एवं सामाजिक प्रतिबद्धता का एक प्रेरणादायक प्रदर्शन बनकर उभरा है, जो इस संदेश की पुष्ट करता है कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत युवा पीढ़ी से ही होती है।



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