छत्रपति संभाजीनगर: बॉम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने दलित छात्र सोमनाथ सूर्यवंशी की हिरासत में हुई मौत से संबंधित एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई की है। कानून के अंतिम वर्ष के छात्र सोमनाथ (35) को दिसंबर 2024 में उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वह परभणी में बी आर अंबेडकर की प्रतिमा के पास एक विरोध प्रदर्शन का फिल्मांकन कर रहे थे। यह प्रदर्शन संविधान की प्रतिकृति के अपमान के खिलाफ हो रहा था।
माँ ने प्रताड़ना का आरोप लगाया
कथित तौर पर कई प्रदर्शनकारियों के साथ सोमनाथ को प्रताड़ित किया गया था और न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान उन्हें चिकित्सा सहायता नहीं दी गई थी। छात्र की मां ने एक याचिका दायर कर अपने बेटे की हिरासत में प्रताड़ना का आरोप लगाया था, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने हालांकि दिल का दौरा बताकर प्रताड़ना के आरोप को खारिज कर दिया था, परंतु पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटें दर्ज की गई थीं।
क्या हुआ बुधवार को सुनवाई में?
बुधवार को सुनवाई के दौरान, वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता और अधिवक्ता प्रकाश अंबेडकर ने पुलिस विभाग और गृह विभाग के प्रधान सचिव द्वारा दायर हलफनामों पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने दलील दी कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अदालत के निर्देशों के अनुपालन को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत हलफनामे मामले की गंभीरता को नहीं दर्शाते हैं और हिरासत में मौत से जुड़े मामले में न्याय की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रहे हैं।
अंबेडकर ने कुछ गंभीर कानूनी कमियों को भी रेखांकित किया। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 196 (पहले धारा 176) का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार हिरासत में होने वाली मौतों की जांच अप्राकृतिक मौत के मामलों के रूप में की जाती है, लेकिन कानून यह स्पष्ट रूप से नहीं बताता कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इस बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि न तो केंद्र सरकार ने ही और न ही राज्य सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए संशोधन पेश किए हैं।
आज सबसे पहले इस मामले की सुनवाई
अंबेडकर ने तर्क दिया कि अदालत के समक्ष पेश होने वाले अधिकारियों के पास नीतिगत स्तर के निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कानूनी अस्पष्टता को हल करने के लिए संबंधित मंत्रियों को सीधे बुलाने और स्पष्टीकरण मांगने का आग्रह किया कि अपूर्ण कानूनी ढांचे को कब सुधारा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार अतिरिक्त समय मांगना चाहती है, तो ऐसा निर्णय केवल मंत्रियों की उपस्थिति में ही लिया जाना चाहिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने गुरुवार को सबसे पहले इस मामले की सुनवाई करने का निर्णय लिया।



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Thu, Feb 05 , 2026, 08:40 AM