लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण (Forest and Wildlife Conservation) को लेकर सरकार के निरंतर प्रयास अब स्पष्ट रूप से नज़र आने लगे हैं। प्रदेश की हालिया शीतकालीन राज्यव्यापी गणना (Winter Statewide Census) में राज्य पक्षी सारस की कुल संख्या 20,628 दर्ज की गई है, जो बीते वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाती है। बुधवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (Wildlife) अनुराधा वेमुरी ने बताया कि वन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन दो चरणों में सारस गणना कराई जाती है। इस वर्ष शीतकालीन गणना प्रदेश के 68 वन प्रभागों में संपन्न हुई। इसमें इटावा वन प्रभाग सबसे आगे रहा, जहां 3,304 सारस पाए गए। वहीं मैनपुरी में 2,899, औरैया में 1,283, शाहजहांपुर में 1,078, गोरखपुर में 950, कन्नौज में 826, कानपुर देहात में 777, हरदोई में 752, सिद्धार्थनगर में 736 और संतकबीर नगर में 701 सारस दर्ज किए गए।
उन्होंने कहा कि, प्रदेश के 10 वन प्रभागों में सारसों की संख्या 500 से अधिक रही। इसके अलावा 29 वन प्रभागों में 100 से 500 के बीच और शेष 29 वन प्रभागों में 100 से कम सारस पाए गए। इस व्यापक गणना अभियान में प्रदेशभर से करीब 10 हजार नागरिकों की सहभागिता रही, जिससे जनभागीदारी के साथ संरक्षण प्रयासों को नई मजबूती मिली।प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अभियानों का ही परिणाम है कि सारस की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2023 में जहां 19,196 सारस दर्ज किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या 19,994 तक पहुंची और अब 2026 की शीतकालीन गणना में 20,628 हो गई है। उन्होंने बताया कि गणना से पहले वन विभाग ने सारस बाहुल्य प्राकृतिक आवासों का विस्तृत सर्वे कर प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विभाग वन्यजीव संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहा है, जिसका सकारात्मक असर सारस की बढ़ती आबादी के रूप में सामने आ रहा है।



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Wed, Feb 04 , 2026, 06:25 PM