National Devbhumi Party protests against UGC: हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी ने किया यूजीसी के समानता नियमों का विरोध!

Thu, Jan 29 , 2026, 08:16 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

शिमला: राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी (आरडीपी) ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय का घेराव किया औऱ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नये नियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी अपने गले में रस्सियां और हथकड़ियां लेकर आए थे और आरोप लगाया कि नए नियम ऊंची जातियों पर सीधा हमला हैं और उनके युवाओं को अपराधी बना देंगे।

विवाद की वजह से प्रदर्शनकारियों द्वारा यूसीजी के नियमों की विवादास्पद व्याख्या है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन नियमों के तहत, किसी भी विश्वविद्यालय में उच्च जाति की छात्रा या छात्र को जातिगत अत्याचारों की शिकायत करने पर तुरंत संदिग्ध मान लिया जाएगा। इसके अलावा, उनका दावा है कि ये नियम इन विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जवाबी शिकायत दर्ज करने का अवसर देने से इनकार करते हैं, जिससे परिसर में एक असंतुलित कानूनी लड़ाई का माहौल बन सकता है।

इस दौरान संगठन के संयोजक आर.एस. ठाकुर ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "केंद्र में भाजपा सरकार ने उच्च जाति समुदाय को गहरा आघात पहुंचाया है।" उन्होंने इन नियमों को शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव दोनों के लिए हानिकारक बताया और आरोप लगाया कि ये कुछ खास वर्गों को निशाना बना रहे हैं और युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं।
श्री ठाकुर ने इस कानून को लेकर विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, सांसद अनुराग ठाकुर और अभिनेत्री-राजनेता कंगना रनौत पर निशाना साधा।

उन्होंने उनके अतीत के नारों को याद दिलाते हुए उनकी चुप्पी पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, "भाजपा के नेता जो 'अगर हम बंटेंगे तो कट जाएंगे' जैसे नारे लगाते थे, वो अब उच्च जातियों के हितों पर हुए हमलों के बाद इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे हैं।" प्रधानमंत्री को सीधे चुनौती देते हुए श्री ठाकुर ने सवाल किया, "क्या वे एक वर्ग के प्रधानमंत्री हैं या 140 करोड़ लोगों के?" उन्होंने सरकार पर उच्च जाति समुदाय को कुचलने के लिए कानून लाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऊंची जातियां पहले से ही आरक्षण और कानून को लेकर लगातार संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने दावा किया, "अब यूजीसी के नए नियमों के साथ, उनके बच्चों को जेल में डालने की तैयारी चल रही है।"

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ये नियम शिक्षण संस्थानों में सामाजिक संतुलन बिगाड़ेंगे, कुछ समूहों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देंगे और योग्यता आधारित व्यवस्था को कमजोर करेंगे। ठाकुर ने आरोप लगाया, "सरकारें इस मुद्दे पर खुलकर सच बोलने से बच रही हैं। शिक्षा को सामाजिक विभाजन के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यूजीसी के नियमों को वापस नहीं लिया गया, तो पूरा हिमाचल प्रदेश बंद किया जाएगा।

गौरतलब है कि यूजीसी ने 13 जनवरी, 2026 को 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026' को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया। ये अनिवार्य नियम भारतीय परिसरों में जाति-आधारित और अन्य प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने के लिए एक सख्त औऱ कानूनी रूप से लागू करने योग्य ढांचा बनाने के लिए 2012 के दिशानिर्देशों का स्थान लेगा। पहली बार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भेदभाव विरोधी सुरक्षा में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।

Latest Updates

Latest Movie News

Get In Touch

Mahanagar Media Network Pvt.Ltd.

Sudhir Dalvi: +91 99673 72787
Manohar Naik:+91 98922 40773
Neeta Gotad - : +91 91679 69275
Sandip Sabale - : +91 91678 87265

info@hamaramahanagar.net

Follow Us

© Hamara Mahanagar. All Rights Reserved. Design by AMD Groups