नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने गुरुवार को अभिनेता विजय (actor Vijay') की फिल्म 'जन नायकन' (Jan Nayakan) संबंधी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) के समक्ष जाने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने इस मसले पर उच्च न्यायालय को 20 जनवरी तक निर्णय लेने का निर्देश भी दिया। इस याचिका में फिल्म को सेंसर प्रमाण पत्र देने संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के स्थगन के आदेश को चुनौती दी गयी थी।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस 'तीव्रता' (haste) पर सवाल उठाया, जिस तीव्रता से उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश की पीठ ने नौ जनवरी को फिल्म के लिए सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने उल्लेख किया कि निर्माता ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष के छह जनवरी के आदेश को चुनौती तक नहीं दी थी, जिसके तहत फिल्म को पुनरीक्षण समिति के पास भेजा गया था।
प्रोडक्शन हाउस केवीएन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि प्रमाणन में देरी के कारण उनके मुवक्किल 'बर्बाद' हो गए हैं। जब न्यायमूर्ति दत्ता ने पूछा कि ऐसा दावा क्यों किया जा रहा है, तो श्री रोहतगी ने तर्क दिया, "यदि किसी फिल्म में देरी होती है, तो लोग रुचि खो देते हैं। इसका मूल्य समाप्त हो जाता है।" पीठ ने हालांकि हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और श्री रोहतगी से अपनी सभी दलीलें मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष रखने को कहा।
उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह अपने पास लंबित याचिका पर तेजी से और 20 जनवरी तक निर्णय ले। मद्रास उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों वाली पीठ ने नौ जनवरी को आदेश पारित होने के कुछ ही घंटों के भीतर फिल्म को 'यू/ए 16' प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। उच्चतम न्यायालय के समक्ष सीबीएफसी और उसके क्षेत्रीय अधिकारी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। सीबीएफसी ने तर्क दिया कि परीक्षण समिति के पांच सदस्यों में से एक ने अध्यक्ष के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सिफारिश किए जाने से पहले उनकी आपत्तियों पर उचित विचार नहीं किया गया था।
बोर्ड ने तर्क दिया कि सिनेमैटोग्राफ (Certification) नियम, 2024 के तहत, यदि अध्यक्ष परीक्षण पैनल की सिफारिश से सहमत नहीं हैं, तो उन्हें फिल्म को पुनरीक्षण समिति के पास भेजने का अधिकार है। यह भी तर्क दिया गया कि सेंसर प्रमाणपत्र प्रदान करने की योग्यता पर न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है। इन टिप्पणियों के मद्देनजर, उच्चतम न्यायालय ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने उच्च न्यायालय को 20 जनवरी तक मामले का फैसला करने का निर्देश दिया है।



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Thu, Jan 15 , 2026, 06:09 PM