गोवा: मतदाता सूची का मसौदा मंगलवार को जारी, 58 लाख से अधिक मतदाता चिह्नित

Tue, Dec 16 , 2025, 04:00 PM

Source : Uni India

कोलकाता। चुनाव आयोग (election Commission) मंगलवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मतदाता सूची (Voter list) का मसौदा जारी करेगा जिससे 2026 के विधानसभा चुनावों (Assembly elections) से पहले राज्यव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान समाप्त हो जाएगा।
आयोग के सूत्रों ने कहा कि मसौदा सूची (Draft list) पहले ही आंतरिक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) एप्लिकेशन पर अपलोड की जा चुकी है, जिससे फील्ड स्टाफ को सार्वजनिक रूप से जारी होने से पहले बूथ-वार डेटा तक पहुंच प्राप्त होगी और यह जल्द ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जनता की सुविधा के लिए जिला स्तरीय वेबसाइटें सक्रिय कर दी हैं जिनके माध्यम से मतदाता आज से अपने नाम एवं विवरण की जांच कर सकते हैं। मतदाता सूचियों का मसौदा प्रकाशित होने के साथ ही गणना का अंत तथा दावों, आपत्तियों एवं सुनवाई का विवादास्पद चरण शुरू हो सकता है जिसके फरवरी 2026 तक चलने की उम्मीद है। अंतिम मतदाता सूचियों का प्रकाशन अस्थायी रूप से फरवरी के मध्य में किया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम एसआईआर अभियान के दौरान संदिग्ध पाए गए हैं उन्हें अंतिम निर्णय लेने से पहले सत्यापन एवं सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।उन्होंने कहा कि मसौदा सूची में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि अंतिम मतदाता सूची में भी उनका नाम बरकरार रहेगा। चुनाव आयोग द्वारा 27 अक्टूबर को अधिसूचना जारी करने के बाद एसआईआर प्रक्रिया चार नवंबर को शुरू हुई, उस समय राज्य में 7,66,37,529 पंजीकृत मतदाता थे। अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं ने अधूरे हस्ताक्षरित फॉर्म जमा किए हैं उन्हें भी मसौदा मतदाता सूची में रखा गया है हालांकि सत्यापन चरण के दौरान उनके विवरणों की गहन जांच की जाएगी।
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं की पहचान हुई है। अधिकारियों द्वारा 2002 की मतदाता सूचियों से मिलान करने में विफल रहने के बाद 30 लाख से अधिक नामों को "नामांकन नहीं" की श्रेणी में रखा गया है। इस समूह के लिए सुनवाई कल से शुरू होने वाली है। इसके अलावा, लगभग 1.7 करोड़ मतदाताओं को अलग-अलग स्तरों पर जांच के दायरे में रखा गया है और मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद बीएलओ को घर-घर जाकर नए सिरे से सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है।
मसौदा मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की संभावना है। नवीनतम स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, मृत मतदाता, निवास बदल चुके मतदाता, लापता मतदाता, दोहरा नाम दर्ज करने वाले मतदाता और जनगणना प्रपत्र जमा न करने वाले मतदाताओं जैसी मानक श्रेणियों के अंतर्गत 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के लिए चिह्नित किए गए हैं। बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के एक सदस्य ने कहा कि हमारा अनुमान है कि मसौदा सूचियों में लगभग 59 लाख नाम हटाए जाने के लिए चिह्नित किए गए हैं।
मतदाता सूची जारी होने से पहले ही, पिछले सप्ताह प्रकाशित निर्वाचन क्षेत्रवार हटाए गए उम्मीदवारों के आंकड़ों ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भबानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी के नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र की तुलना में काफी अधिक उम्मीदवार हटाए जाने के लिए चिन्हित किए गए हैं जिससे 2021 के विधानसभा चुनाव की यादें ताजा हो गई हैं, जिसमें दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था।
चुनाव अधिकारियों ने हालांकि, कहा कि भबानीपुर सबसे अधिक प्रभावित सीट नहीं है बल्कि उत्तरी कोलकाता का चौरंगी सबसे अधिक प्रभावित सीट है, उसके बाद कोलकाता पोर्ट और टॉलीगंज का स्थान है।
आसनसोल दक्षिण और सिलीगुड़ी जैसी भाजपा नियंत्रित सीटों पर भी काफी संख्या में मतदाताओं का नाम शामिल हैं। जिलेवार देखें तो दक्षिण 24 परगना सबसे ज्यादा प्रभावित है जबकि बांकुरा जिले का कोतुलपुर में सबसे कम। एसआईआर के दौरान पूरे राज्य में 90,000 से अधिक बीएलओ तैनात किए गए। इस संशोधन की तुलना बिहार से की जा रही है जहां इसी वर्ष की शुरुआत में इसी तरह का एक एसआईआर हुआ था जिसके कारण लगभग 65 लाख नाम मसौदा सूची से बाहर किए गए थे जिसका भारी राजनीतिक विरोध हुआ था।

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