New hope for peace on the border: भारत और चीन के रिश्तों (India and China relations) पर जमी बर्फ की चादर अब धीरे-धीरे पिघल रही है। इसका स्पष्ट उदाहरण आज नियंत्रण रेखा (LAC) पर देखने को मिला। यहां दिवाली के मौके पर भारतीय और चीनी सैनिकों ने एक दूसरे को मिठाइयां बांटीं। दोनों देशों ने लद्दाख में दो संवेदनशील बिंदुओं डेमचोक और देपसांग मैदानों के सीमांकन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। दिवाली के मौके पर एक ऐसा नजारा सामने आया जिसे राजनीतिक कूटनीति का नतीजा माना जा रहा है। कथित तौर पर चुशूल-मोल्डो सीमा बैठक स्थल पर मिठाइयों का आदान-प्रदान किया गया।
दिवाली से पहले भारत और चीन के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल गई है। पूर्वी लद्दाख में प्रत्यक्ष नियंत्रण रेखा (LAC) पर दो स्थानों डेपसांग और डेमचोक से भारत-चीन सैनिकों की वापसी बुधवार शाम को पूरी हो गई। अब दोनों स्थानों पर पहले की तरह गश्त शुरू कर दी जाएगी। 31 अक्टूबर को दिवाली के दिन दोनों देशों के सैनिकों ने एक-दूसरे को बधाई दी।
भारत और चीन के बीच हाल ही में हुए समझौते के मुताबिक इस महीने के अंत तक सैनिकों की वापसी का लक्ष्य रखा गया था। विदेश सचिव ने सोमवार को समझौते की घोषणा की और मंगलवार को सेना की वापसी शुरू हो गई। कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरा कर लिया गया है। कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत में इस समझौते को तेजी से लागू भी किया गया।
हवाई सर्वेक्षण आज पूरा होने की संभावना -
सेना के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि दोनों स्थानों से सैनिक पीछे हट गए हैं। इसका मतलब है कि वे वापस वहीं आ गए हैं जहां वे अप्रैल 2020 में थे। सैनिकों की वापसी के बाद दोनों पक्ष इसकी पुष्टि कर रहे हैं, जिसके लिए हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया भी गुरुवार को पूरी होने की उम्मीद है।
सूत्रों ने बताया कि गश्त का तरीका दोनों देशों की सेनाओं के स्थानीय कमांडरों के बीच चर्चा के बाद तय किया जाएगा. जिसके बाद यह शुरू हो जाएगा। हालांकि सेना की ओर से इसकी कोई तारीख नहीं बताई गई है, लेकिन एक-दो दिन में इसे लॉन्च किए जाने की संभावना है। स्थानीय कमांडर आमतौर पर ब्रिगेडियर से नीचे कर्नल रैंक के अधिकारी होते हैं। गलवान, पैंगोंग लेक नॉर्थ, पैंगोंग लेक साउथ, हॉट स्प्रिंग और गोगरा से चीनी सैनिक पीछे हट गए हैं। शेष पांच स्थानों पर भी गश्त शुरू की जाएगी, लेकिन यह समझौते का हिस्सा नहीं है। इसके लिए भारत और चीन के बीच अलग-अलग बातचीत चल रही है.
आगे क्या होगा
अब डेपसांग और डेमचोक में अप्रैल 2020 से गश्त शुरू कर दी जाएगी। गश्त के पैटर्न पर स्थानीय कमांडर चर्चा कर निर्णय लेंगे। दूसरा बड़ा कदम देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की कटौती थी। हालांकि दोनों देशों की सेनाएं अपनी पुरानी जगहों पर लौट आई हैं और वहां 50-50 हजार सैनिक मौजूद हैं। इसे चरण दर चरण कम करना होगा। इसके लिए दोनों देशों में अलग से चर्चा शुरू की जाएगी।क्षेत्र में दोनों देशों की सेना की नई चौकियां बन गई हैं, जिन्हें हटाना होगा। बाकी पांच स्थानों पर भी यही पूरी प्रक्रिया अपनानी होगी।
देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी बेहद सकारात्मक कदम है. तो बाकी सवालों को हल करने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन अप्रैल 2020 से पहले हालात सामान्य करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी, इसमें वक्त लगेगा। एलएसी से अतिरिक्त सैनिकों की वापसी के बाद टकराव पूरी तरह खत्म माना जाएगा। यह बात लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र सिंह (सेवानिवृत्त) ने कही है।



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Thu, Oct 31 , 2024, 09:40 PM