लखनऊ, 11 अक्टूबर (वार्ता)। लोक नायक जयप्रकाश नारायण (Jaiprakash Narayan) की जयंती पर शुक्रवार को एक बार फिर लखनऊ में राजनीति गरमा गयी। दरअसल, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) (JPNIC) में निर्माण कार्य का हवाला देते हुये समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और उनके समर्थकों को जाने की अनुमति नहीं दी वहीं अखिलेश ने यह सब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के इशारे पर किये जाने का आरोप लगाते हुये कहा कि सरकार जेपीएनआईसी को बेचना चाहती है और इसी कारण उन्हे वहां जाने से रोका गया है।
अखिलेश ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुये अपने घर में रखी जेपी की प्रतिमा को बीच सड़क पर रख दिया और उस पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर उन्होने कहा कि मौजूदा सरकार भी समाजवादियों की बदौलत चल रही है। यह मौका है जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को भाजपा से समर्थन वापस ले लेना चाहिये क्योंकि वह भी जेपी आंदोलन से निकले हैं और उनकी भी जयप्रकाश नारायण में पूरी आस्था है।
आज सुबह सपा के सैकड़ों कार्यकर्ता और समर्थक विक्रमादित्य मार्ग स्थित सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के घर के बाहर इकट्ठा हुये। उनकी जेपीएनआईसी जाने की योजना थी मगर सुरक्षा बल के कड़े बंदोबस्त के कारण यह संभव नहीं हो सका जिसके चलते अखिलेश ने सड़क पर ही जेपी की प्रतिमा को रख कर उस पर माल्यार्पण किया।
इससे पहले लखनऊ विकास प्राधिकरण ने कहा था कि जेपीएनआईसी में निर्माण कार्य चल रहा है। इस कारण श्री यादव का निर्धारित दौरा सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है।
अखिलेश ने इसे सरकार की साजिश बताते हुये कहा, “ जयप्रकाश नारायण जी की जयंती के अवसर पर हम हर बार जेपीएनआईसी संग्रहालय जाते हैं। लेकिन पता नहीं यह सरकार हमें ऐसा करने से क्यों रोकती है। यह नाकाबंदी पहली बार नहीं की जा रही है। इसने सभी अच्छे कामों को रोक दिया है। आज हम सड़क पर खड़े होकर 'जन-नायक' को याद कर रहे हैं। यह सरकार हमें माल्यार्पण करने से रोकना चाहती है।”
उन्होंने कहा कि जेपीएनआईसी में स्मारक को बेचने की साजिश के कारण ढक दिया गया है। कल्पना कीजिए, एक सरकार है जो एक संग्रहालय को बेचना चाहती है।
जेपी के नाम से विख्यात समाजवादी नेता और आपातकाल विरोधी आंदोलन के प्रतीक जयप्रकाश नारायण की आज जयंती है।
इससे पहले एलडीए ने आठ अक्टूबर के अपने पत्राचार का हवाला देते हुए एक पत्र में कहा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री यादव, जिन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है, कन्वेंशन सेंटर में स्थित प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहते थे। एलडीए ने 10 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा है, “यह अवगत कराना है कि इंजीनियरिंग विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण ने कार्य स्थल की अद्यतन स्थिति के संबंध में रिपोर्ट उपलब्ध कराई है, जिसमें जेपी नारायण कन्वेंशन सेंटर परियोजना अभी निर्माणाधीन है, जिसके कारण निर्माण सामग्री अनियोजित तरीके से रखी गई है और बरसात का मौसम होने के कारण अवांछित जीवों के मौजूद होने की संभावना है। यह स्थल उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, जिन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, की सुरक्षा की दृष्टि से माल्यार्पण/भ्रमण के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया है।”
श्री यादव ने शुक्रवार की सुबह सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप और तस्वीरें साझा कीं, जिसमें पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) सहित सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ-साथ यहां विक्रमादित्य मार्ग पर उनके घर के पास बैरिकेड्स लगे हैं। यह घर सपा मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “भाजपा के लोग हों या इनकी सरकार, इनका हर काम नकारात्मकता का प्रतीक है। पिछली बार की तरह समाजवादी लोग कहीं ‘जय प्रकाश नारायण जी’ की जयंती पर उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण करने न चले जाएं, इसीलिए उन्हें रोकने के लिए हमारे निजी आवास के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गयी है।”
सपा प्रमुख ने यह भी दावा किया कि भाजपा ने श्रद्धांजलि, पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक), सौहार्द का मार्ग, शांति का मार्ग, संविधान का मार्ग, आरक्षण का मार्ग, किसानों का मार्ग, महिलाओं का सम्मान, युवाओं का विकास, सच्चा मीडिया, रोजगार, व्यापार, पेंशन... तरक्की, उज्ज्वल भविष्य, आजादी का रास्ता रोका है।
उन्होने कहा, “भाजपा हमेशा स्वतंत्रता-सेनानियों और स्वतंत्रता आंदोलन की विरोधी रही है। रास्ते रोकना इन्होंने औपनिवेशिक शक्तियों के साथ रहने और दबे-छुपे उनका साथ देने से सीखा है। जन-जन कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा।”
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “सत्ता के मद में चूर भाजपा लोकतंत्र की बैरिकेडिंग करना चाहती है । सत्ता का तंत्र कभी लोक के तंत्र पर भारी नहीं हो सकता। अतीत से सबक लीजिए सरकार। लोकतंत्र में तानाशाही लंबी नहीं चलती।”
जय प्रकाश नारायण की जयंती की पूर्व संध्या पर अखिलेश कल देर रात गोमती नगर इलाके में जेपीएनआईसी पहुंचे थे और योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रवेश रोकने के लिए इसके मुख्य द्वार को टिन की चादरों के पीछे बंद कर दिया है।
पिछले साल सपा प्रमुख अखिलेश यादव को जेपीएनआईसी के द्वार पर चढ़कर परिसर में स्थित जय प्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना पड़ा था।
अखिलेश यादव ने कल रात केंद्र के बाहर संवाददाताओं से कहा था, ‘‘यह समाजवादियों का संग्रहालय है, यहां जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा है और इसके अंदर ऐसी चीजें हैं जिनसे हम समाजवाद को समझ सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ये टिन की चादरें लगाकर सरकार क्या छिपा रही है। क्या ऐसी संभावना है कि वे इसे बेचने की तैयारी कर रहे हैं या किसी को देना चाहते हैं।’’
जेपीएनआईसी का उद्घाटन अखिलेश यादव ने 2016 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान किया था। हालांकि, 2017 में राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद इमारत का काम बंद हो गया। इस केंद्र में जयप्रकाश नारायण व्याख्या केंद्र (संग्रहालय) के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी हैं।



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