Death Anniversary: दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह, मुकेश निजी जिंदगी में भी थे बेहद संवेदनशील इंसान 

Mon, Aug 26 , 2024, 11:43 AM

Source : Uni India

मुंबई। दर्द भरे नगमों (sad songs) के बेताज बादशाह मुकेश (Mukesh) के गाये गीतों में  जहां संवेदनशीलता दिखाई देती है, वहीं निजी जिंदगी में भी वह बेहद संवेदनशील इंसान थे और दूसरों के दुखदर्द को अपना समझकर उसे दूर करने का प्रयास करते थे। इस संबंध में एक वाकया है कि एक बार एक लडकी बीमार हो गई। उसने अपनी मां से कहा कि यदि मुकेश उन्हें कोई गाना गाकर सुनाएं तो वह ठीक हो सकती है। मां ने जवाब दिया कि मुकेश बहुत बड़े गायक हैं। भला उनके पास तुम्हारे लिए कहां समय है। यदि वह आते भी हैं तो इसके लिए काफी पैसे लेंगे। तब उसके डॉक्टर ने मुकेश को उस लडकी की बीमारी के बारे में बताया।

मुकेश तुरंत लड़की से मिलने अस्पताल गए (hospital to meet the girl) और उसके गाना गाकर सुनाया और इसके लिए उन्होंने कोई पैसा भी नहीं लिया। लड़की को खुश देखकर मुकेश ने कहा कि यह लड़की जितनी खुश है उससे ज्यादा खुशी मुझे मिली है। मुकेश चंद माथुर (Mukesh Chand Mathur) का जन्म 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता लाला जोरावर चंद माथुर एक इंजीनियर थे और वह चाहते थे कि मुकेश उनके नक्शे कदम पर चलें, लेकिन वह अपने जमाने के प्रसिद्ध गायक अभिनेता कुंदनलाल सहगल (Kundanlal Sehgal) के प्रशंसक थे और उन्हीं की तरह गायक अभिनेता बनने का ख्वाब देखा करते थे।

मुकेश ने दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद स्कूल छोड़ दिया और दिल्ली लोक निर्माण विभाग में सहायक सर्वेयर की नौकरी कर ली। जहां उन्होंने सात महीने तक काम किया। इसी दौरान अपनी बहन की शादी में गीत गाते समय उनके दूर के रिश्तेदार मशहूर अभिनेता मोतीलाल ने उनकी आवाज सुनी और प्रभावित होकर वह उन्हें 1940 में वह मुंबई ले आए और उन्हें अपने साथ रखकर पंडित जगन्नाथ प्रसाद से संगीत सिखाने का भी प्रबंध किया।
इसी दौरान मुकेश को एक हिन्दी फिल्म ..निर्दोष (1941) में अभिनेता बनने का मौका मिल गया जिसमें उन्होंने अभिनेता-गायक के रूप में संगीतकार अशोक घोष के निर्देशन में अपना पहला गीत..दिल ही बुझा हुआ हो तो..भी गाया। 

हालांकि, यह फिल्म टिकट खिड़की पर बुरी तरह से नकार दी गयी। इसके बाद मुकेश ने दुख-सुख, आदाब अर्ज जैसी कुछ और फिल्मों में भी काम किया लेकिन पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो सके।मोतीलाल प्रसिद्ध संगीतकार अनिल विश्वास के पास मुकेश को लेकर गये और उनसे अनुरोध किया कि वह अपनी फिल्म में मुकेश से कोई गीत गवाएं। वर्ष 1945 में प्रदर्शित फिल्म ‘पहली नजर’ में अनिल विश्वास के संगीत निर्देशन में .. दिल जलता है तो जलने दे..गीत के बाद मुकेश कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये।

Latest Updates

Latest Movie News

Get In Touch

Mahanagar Media Network Pvt.Ltd.

Sudhir Dalvi: +91 99673 72787
Manohar Naik:+91 98922 40773
Neeta Gotad - : +91 91679 69275
Sandip Sabale - : +91 91678 87265

info@hamaramahanagar.net

Follow Us

© Hamara Mahanagar. All Rights Reserved. Design by AMD Groups