Stalin Rally: स्टालिन ने मोदी, शाह, प्रधान को दी चुनौती, तमिलनाडु आकर करें 'त्रिभाषा फॉर्मूले' (Three Language Formula) पर चुनाव प्रचार करें!

Sun, Apr 05 , 2026, 07:21 PM

Source : Uni India

चेन्नई। चुनाव की दहलीज पर खड़े तमिलनाडु में सीबीएसई का अनिवार्य 'त्रिभाषा फॉर्मूला' बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है। दशकों से 'द्विभाषा फॉर्मूले' का पालन कर रहे इस द्रविड़ राज्य के मुख्यमंत्री एवं द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Minister Amit Shah) और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Minister Dharmendra Pradhan) को इस भाषाई मुद्दे पर तमिलनाडु में आकर चुनाव प्रचार करने की सीधी चुनौती दी।


श्री स्टालिन ने विरुधुनगर में विशाल चुनावी रैली (Massive Election Rally) को संबोधित करते हुए कहा, "भले ही हम चुप रहें, लेकिन किसी न किसी रूप में हिंदी को थोपने की कोशिश कर भाजपा तमिलनाडु में अपनी कब्र खुद खोद रही है। वे इसमें बहुत माहिर हैं। मैं प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनौती देता हूं कि जब वे यहां चुनाव प्रचार के लिए आएं, तो 'त्रिभाषा नीति' के पक्ष में प्रचार करके दिखायें। यह मेरी खुली चुनौती है।"

 


इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से सवाल किया कि 'त्रिभाषा फॉर्मूले' और 'शिक्षा के स्तर' के बीच क्या तर्क है? उन्होंने श्री प्रधान के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु में शिक्षा का स्तर बेहद कम है। श्री स्टालिन ने याद दिलाया कि 'सकल नामांकन अनुपात' (जीईआर) के मामले में तमिलनाडु पूरे देश में शीर्ष पर बना हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि क्या एडप्पादी पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक और अन्य राजग सहयोगी इस त्रिभाषा नीति से सहमत हैं? श्री पलानीस्वामी को 'विश्वासघातियों के सरदार' बताते हुए श्री स्टालिन ने कहा, "अगर फिल्म बाहुबली में 'कटप्पा' वफादारी का प्रतीक है, तो श्री पलानीस्वामी 'विश्वासघात' के जीते-जागते उदाहरण हैं।"

 


उन्होंने पूछा कि क्या अन्नाद्रमुक में इस त्रिभाषा नीति को चुनौती देने की हिम्मत है, जो राज्य की नीतियों के बिल्कुल विपरीत है? श्री पलानीस्वामी पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जगजाहिर तथ्य है कि केंद्र सरकार हमारा टैक्स वसूलती है और उसे उत्तरी राज्यों को दे देती है, जिससे हमारे लिए कृत्रिम वित्तीय संकट पैदा हो गया है। इसके बावजूद द्रमुक सरकार ने इन बाधाओं को पार किया है और पेंशन योजना सहित अपने सभी वादों को सफलतापूर्वक लागू किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, "केंद्र की भाजपा नीत सरकार को जवाबदेह ठहराने के बजाय श्री पलानीस्वामी मुझे निशाना बना रहे हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि उन्होंने सुश्री जयललिता की विरासत के साथ विश्वासघात किया और उसी पार्टी के साथ गठबंधन किया जिसका सुश्री जयललिता ने पुरजोर विरोध किया था।"

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