नयी दिल्ली: भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में 'विकास के लिए निवेश सुविधा' पर समझौते को वैश्विक व्यापार के नियम बनाने वाले इस बहुपक्षीय संगठन के अंतर्गत लाने के प्रस्ताव का अकेले ही विरोध किया है।
विकासशील देशों में निवेश के नियमों को अनुकूल बनाने के समझौते की इस पहल को खास कर चीन के नेतृत्व में कुछ देश आगे बढ़ा रहे हैं। भारत निवेश को डब्ल्यूटीओ के एजेंडा में लाने का पहले से विरोध करता रहा है।
जिनेवा में मुख्यालय वाले संगठन डब्ल्यूटीओ की 14 मंत्रिस्तरीय बैठक इस समय मध्य अफ्रीकी देश कैमरून के याउंडे में चल रही है। 26-29 मार्च तक चलने वाले इस सम्मेलन में भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार देर रात एक सोसल मीडिया पोस्ट में कहा, ' डब्यूटीओ के शीर्ष निर्णायक निकाय (14वीं) मंत्रिस्तरीय बैठक में, महात्मा गांधी जी के इस दर्शन से प्रेरणा लेते हुए कि सत्य हमेशा झुंड प्रवृत्ति पर भारी पड़ता है, भारत ने 'विकास के लिए निवेश सुविधा' (आईएफडी) समझौते जैसे विवादास्पद मुद्दे पर अकेले खड़े होने का साहस दिखाया।"
उल्लेखनीय है कि एक बड़े समूह द्वारा प्रेरित पहल है जिसका मकसद निवेश प्रक्रियाओं को आसान बनाना, निवेश व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) को आकर्षित करने के लिए सहयोग बढाना है। मुख्य रूप से चीन के नेतृत्व वाले 120 से ज़्यादा देशों का एक गठबंधन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि यह पहल विकासशील देशों के लिए "निवेश का माहौल" बेहतर बनाने के लिए है। यह पहल ऐसे समय हो रही है जबकि चीन को कई देशों में अपनी निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत ने इस समझौते को डब्ल्यूटीओ के ढांचे में ' चौथी अनुसूची के समझौते' के रूप में शामिल किए जाने पर अपनी सहमति दर्ज की है। भारत का मानना है कि इस समझौते को शामिल करने से डब्ल्यूटीओकी कार्य-सीमाओं के क्षीण होने और उसके मूलभूत सिद्धांतों के कमज़ोर पड़ने का जोखिम है। अनुसूची-4 के समझौते बहुलवादी समझौते होते हैं और उन्हीं देशों में लागू होते हैं इसमें शामिल हैं।
गोयल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ में सुधारों से संबंधी चर्चाओं के अंतर्गत सदस्य देश ऐसे कुछ खास खास विषयों पर सदस्यों के बड़े समूहों के बीच हुए अलग अलग समझौतों (बहुतवादी समझौतों) को डब्ल्यूटीओ की बहुपक्षीय व्यवस्था में एकीकृत करने से पहले, ऐसे बहुपक्षीय समझौतों के प्रति आवश्यक 'सुरक्षा-घेरों' और कानूनी सुरक्षा उपायों पर चर्चा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस समय सामने मौजूद प्रणालीगत समस्याओं को देखते हुए, भारत ने डब्ल्यूटीओ में सुधारों के एजेंडा के तहत मुद्दों पर सद्भावनापूर्ण, व्यापक और रचनात्मक बातचीत के प्रति अपना खुलापन दिखाया है।



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