Chaitra Navratri 2026 Day 6: नवरात्रि के छठे दिन किसकी उपासना करनी चाहिए? क्या है पूजा विधि?

Tue, Mar 24 , 2026, 08:53 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Chaitra Navratri 2026 Day 6: नवरात्रि या "नौ रातें," देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना को समर्पित है। भक्त इन दिनों व्रत रखते हैं और देवी की विभिन्न तरीकों से पूजा करते हैं। लोग इन दिनों कई तरह की आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। 24 मार्च, 2026 को नवरात्रि के छठे दिन लोग व्रत रखेंगे। यह दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप, देवी कात्यायनी की पूजा को समर्पित है।

चैत्र नवरात्रि छठे दिन का महत्व
देवी कात्यायनी, माँ दुर्गा के सबसे उग्र स्वरूपों में से एक हैं। उनका जन्म इस धरती से राक्षसों का संहार करने के लिए हुआ था। उनके चार हाथ हैं; उनके एक हाथ में लंबी तलवार है, दो हाथों में कमल का फूल है, और चौथा हाथ 'अभय मुद्रा' में है, जिसका उपयोग वह अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए करती हैं।

उन्होंने राक्षसों से युद्ध किया और वह शक्ति तथा ओज का प्रतीक हैं। बृहस्पति ग्रह—जिसे 'बृहस्पति' या सभी देवताओं का गुरु भी कहा जाता है—पर माँ कात्यायनी का ही आधिपत्य है। देवी कात्यायनी को 'महिषासुरमर्दिनी' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने तलवार से महिषासुर नामक राक्षस का सिर काटकर उसका वध किया था।

चैत्र नवरात्रि छठे दिन का रंग: लाल
लाल रंग शक्ति, असीम सामर्थ्य और ओजस्वी ऊर्जा का प्रतीक है। इस रंग को धारण करने से आप स्वयं को अत्यंत शक्तिशाली और ऊर्जावान महसूस करेंगे।

चैत्र नवरात्रि छठा दिन: कथा
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, 'कात्यायन' नामक एक ऋषि थे, जिनकी कोई संतान नहीं थी और वे माँ पार्वती के परम भक्त थे। ऋषि कात्यायन ने देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की और उनसे प्रार्थना की कि वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी पार्वती उनकी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्होंने ऋषि की मनोकामना पूर्ण की। इस प्रकार, देवी पार्वती ने ऋषि कात्यायन की पुत्री के रूप में 'कात्यायनी' का स्वरूप धारण किया।

नवरात्रि के छठे दिन क्या करें?
माँ कात्यायनी को 'महादानी' (वरदान देने वाली) माना जाता है; जो अविवाहित स्त्रियाँ पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से देवी कात्यायनी की पूजा करती हैं, उन्हें उनकी इच्छा के अनुरूप योग्य वर की प्राप्ति होती है। वहीं, जिन विवाहित दंपतियों को अपने वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हो, उन्हें सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए देवी कात्यायनी की आराधना करनी चाहिए। 

चैत्र नवरात्रि - छठा दिन: पूजा विधि

  • सुबह उठते ही पवित्र स्नान करें।
  • आप माँ दुर्गा की मूर्ति के सामने दीपक जला सकते हैं, ताज़े फूल, माला और फल चढ़ा सकते हैं, माथे पर कुमकुम लगा सकते हैं और घर पर बनी मिठाइयाँ अर्पित कर सकते हैं।
  • देवी को कम से कम पाँच श्रृंगार की वस्तुएँ (बिंदी, साड़ी, चूड़ियाँ, मेहंदी, सिंदूर और हल्दी) अर्पित करें।
  • कपूर और लौंग देवी को अर्पित करें।
  • माँ कात्यायनी और देवी दुर्गा की आरती करें।
  • देवी माँ से क्षमा और आशीर्वाद माँगें।
  • देवी को भोग प्रसाद अर्पित करने के बाद, भक्त अपना व्रत तोड़ सकते हैं।

मां कात्यायनी मंत्र
1. ॐ देवी कात्यायनी नमः..!!
2. कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी, नंदगोपसुतं देवि पतिं मे कुरुते नमः..!!

मां कात्यायनी की आरती
जय कात्यायनी माता, मैया जय कात्यायनी माता।
सुख सृष्टि में पाए, जो तुमको ध्याता॥ जय कात्यायनी माता... 
आदि अनादि अनामय, अविचल अविनाशी।
अटल अनंत अगोचर, अज आनंद राशि॥ जय कात्यायनी माता... 
लाल ध्वजा नभ चूमत, मंदिर पे तेरे।
जगमग ज्योति तुम्हारी, मिटाए अंधियारे॥ जय कात्यायनी माता... 
छठवें नवरात्र में, पूजा तुम दाता।
कात्यायन ऋषि की कन्या, तुम हो जगदाता॥ जय कात्यायनी माता... 
दर्शन पाने को तेरे, भक्त द्वार खड़े।
हाथ जोड़कर माता, चरणों में पड़े॥ जय कात्यायनी माता...
कात्यायनी जी की आरती, जो कोई जन गावे।
प्रेम सहित मन लगाकर, सुख संपति पावे॥ जय कात्यायनी माता...

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