OBC Reservation : सिर्फ़ माता-पिता की इनकम के आधार पर OBC क्रीमी लेयर तय नहीं किया जा सकता; सुप्रीम कोर्ट का अहम फ़ैसला

Thu, Mar 12 , 2026, 04:31 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Supreme Court OBC Decision: सुप्रीम कोर्ट ने OBC (Other Backward Class) रिज़र्वेशन को लेकर एक अहम और ऐतिहासिक फ़ैसला दिया है। कोर्ट ने साफ़ किया है कि कोई कैंडिडेट क्रीमी लेयर में आता है या नॉन-क्रीमी लेयर (creamy layer or non-creamy layer) में, यह सिर्फ़ उसके परिवार की इनकम के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। बुधवार (11 मार्च, 2026) को दिए गए इस फ़ैसले से OBC रिज़र्वेशन (OBC Reservation) से जुड़े नियमों में अहम बदलाव हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला: 1993 की गाइडलाइंस के अनुसार फ़ैसला
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आर. महादेवन की बेंच ने यह फ़ैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर तय करते समय सिर्फ़ माता-पिता की सैलरी या इनकम को ध्यान में नहीं रखा जा सकता। इसके बजाय, 1993 की ओरिजिनल गाइडलाइंस के हिसाब से पोस्ट का स्टेटस और दूसरी बातों का ध्यान रखना होगा।

OBC नॉन क्रीमी लेयर: ग्रुप C और D कर्मचारियों की सैलरी शामिल नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर कैंडिडेट के माता-पिता सरकारी नौकरी में ग्रुप C या ग्रुप D (क्लास III या IV) में हैं, तो क्रीमी लेयर तय करते समय उनकी सैलरी को ध्यान में नहीं रखा जाएगा। साथ ही, खेती से होने वाली इनकम को पूरी तरह से बाहर रखा गया है। क्रीमी लेयर तय करते समय बिजनेस, प्रॉपर्टी, किराए वगैरह जैसे दूसरे सोर्स से होने वाली इनकम पर भी ध्यान दिया जाएगा। यह एवरेज लगातार तीन साल तक 8 लाख रुपये सालाना से कम होना चाहिए।

DoPT लेटर इनवैलिड: 2004 का ऑर्डर इनवैलिड
इस फैसले में, कोर्ट ने डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के 2004 के लेटर के पैरा 9 को इनवैलिड करार दिया है। इस लेटर में बैंकों, प्राइवेट सेक्टर और पब्लिक कंपनियों के कर्मचारियों की सैलरी को क्रीमी लेयर में शामिल करने का जिक्र था। कोर्ट ने इस नियम को भेदभाव वाला बताते हुए रद्द कर दिया। 

रिज़र्वेशन का असर: हज़ारों कैंडिडेट्स को राहत
इस फ़ैसले से हज़ारों OBC कैंडिडेट्स को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। क्योंकि पहले, कई कैंडिडेट्स को सिर्फ़ सैलरी के आधार पर क्रीमी लेयर में डालकर रिज़र्वेशन से वंचित किया जा रहा था। कोर्ट ने इस फ़ैसले को पिछली तारीख से लागू करने का आदेश दिया है।

 छह महीने में लागू करना
सुप्रीम कोर्ट ने इस फ़ैसले को लागू करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) को छह महीने का समय दिया है। ज़रूरत पड़ने पर सुपरन्यूमरेरी पोस्ट (अतिरिक्त पोस्ट) बनाने का ऑप्शन भी रखा गया है। अब से सिविल सर्विसेज़ परीक्षा में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर या तहसीलदार द्वारा जारी वैलिड OBC-NCL सर्टिफ़िकेट को प्राथमिकता दी जाएगी।

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