नयी दिल्ली: भारत और ब्रिटेन ने ग्रीन-हाइड्रोजन ऊर्जा प्रौद्योगिकी (green-hydrogen energy technology) के सुरक्षित उपयोग और विस्तार के लिए मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के विकास में सहयोग करने पर साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है। दोनों देशों के बीच हरित हाइड्रोजन मानक (green hydrogen standards) और सुरक्षा प्रोटोकॉल (safety protocols) विषय पर राजधानी में पिछले दिनों आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में इस प्रकार की प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) की ओर से शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक इस सम्मेलन का आयोजन भारत में हरित हाइड्रोजन ऊर्जा पर एक व्यापक सुरक्षा प्रणाली का निर्माण करना और एक विश्वसनीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हरित हाइड्रोजन क्षेत्र के विकास को सुगम बनाने के उद्येश्य से किया गया था।
यह सम्मेलन राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के सहयोग से नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय हाइड्रोजन सुरक्षा केंद्र (एनसीएचएस) में भारत में ब्रिटिश उच्चायोग और डब्ल्यूआरआई इंडिया के सहयोग से आयोजित किया गया था। राजधानी में 27 फरवरी को आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रमुख और तकनीकी विशेषज्ञ एक सुरक्षित हरित हाइड्रोजन भविष्य को आकार देने के लिए शामिल हुए थे। इसमें दोनो देशों की सरकारों, उद्योग, शिक्षा जगत, मानक निकायों, परीक्षण संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और नियामक एजेंसियों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया ताकि भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत हरित हाइड्रोजन के सुरक्षित उपयोग पर सहयोग को मजबूत किया जा सके।
इसमें हरित हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला में नियामक ढांचे, अंतरराष्ट्रीय मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर महत्वपूर्ण चर्चाएँ हुईं। इनमें उत्पादन, भंडारण, परिवहन और अंतिम उपयोग अनुप्रयोग के विषय भी शामिल थे। सम्मेलन को राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के महानिदेशक मोहम्मद रिहान , नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के मिशन निदेशक अभय बकरे, भारत में ब्रिटिश उच्चायोग के प्रथम सचिव (व्यापार) जिनूस शरियाती, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के सचिव अंजन कुमार मिश्रा और भारत में ब्रिटिश उच्चायोग के प्रथम सचिव (जलवायु और ऊर्जा) लौरा आयलेट आदि ने संबोधित किया।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के वैज्ञानिक सचिव परविंदर मैनी ने मुख्य भाषण देते हुए, हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों के बड़े पैमाने पर उपयोग को सक्षम बनाने के लिए मजबूत सुरक्षा ढांचे, मानक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल दिया। चर्चा सत्रों में हाइड्रोजन सुरक्षा और मानकों के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय नियामकों की भी भागीदारी रही। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) ने हाइड्रोजन प्रणालियों के लिए सुरक्षा अनुपालन, जोखिम मूल्यांकन और आपदा प्रबंधन पर नियामक दृष्टिकोण साझा किया। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने विकसित हो रहे मानक ढांचे और भारतीय हाइड्रोजन मानकों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाने के लिए चल रहे प्रयासों पर जानकारी प्रस्तुत की।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में उद्योग, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला में सुरक्षा प्रथाओं पर प्रस्तुतियाँ और चर्चाएँ शामिल थीं। वक्ताओं में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, एनटीपीसी लिमिटेड, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, अरूप, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड, सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला, कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के प्रतिनिधि शामिल थे।
सत्रों में हाइड्रोजन के अंतिम उपयोग अनुप्रयोगों में सुरक्षा प्रथाओं, हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और परिवहन प्रणालियों के सुरक्षित डिजाइन और संचालन, जोखिम मूल्यांकन पद्धतियों, घटना केस स्टडी और हाइड्रोजन सुरक्षा के लिए उन्नत सेंसर प्रौद्योगिकियों और एआई-सक्षम निगरानी जैसे उभरते नवाचारों को शामिल किया गया।
सम्मेलन का समापन भारत और यूके द्वारा मानकों के विकास, नियामक क्षमता निर्माण और सुरक्षा ढाँचों पर सहयोग को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, ताकि हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों के विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर उपयोग को समर्थन मिल सके।



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