नयी दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पश्चिम एशिया संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है। यह अपील ईरान के उन आरोपों के बाद आयी है, जिसमें उसने कहा है कि अमेरिका-इजरायल के संयुक्त अभियानों के दौरान नतांज स्थित उसके विशाल परमाणु परिसर को निशाना बनाया गया था।
यह आरोप सोमवार को आईएईए के 35-देशीय निदेशक मंडल के एक सत्र के दौरान लगाया गया, जहां संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था में ईरान के दूत ने हमले की पुष्टि की। तेहरान का प्रतिनिधित्व कर रहे ईरान के दूत रजा नजफी ने पत्रकारों से कहा, "उन्होंने कल फिर से नतांज़ में ईरान की शांतिपूर्ण और सुरक्षित परमाणु सुविधा पर हमला किया।"यह घटनाक्रम अमेरिका के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और इजरायल के 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के बाद बढ़े क्षेत्रीय तनाव के बीच सामने आया है, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गयी थी।
उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में कई सक्रिय परमाणु ऊर्जा संयंत्र, अनुसंधान रियेक्टर और उनसे जुड़े ईंधन भंडारण स्थल स्थित हैं। हालांकि एजेंसी का 'इंसीडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर' (Incident and Emergency Center) लगातार जानकारी जुटा रहा है और क्षेत्र में विकिरण के स्तर का आकलन कर रहा है। कुछ दिन पहले संघर्ष शुरू होने के बाद से विकिरण स्तर में कोई वृद्धि नहीं पायी गयी है, फिर भी वियना में हुई आईएईए निदेशक मंडल की बैठक ने पक्षों को संयम बरतने की चेतावनी दी है। ईरान के अलावा संयुक्त अरब अमीरात में चार परिचालन परमाणु रिएक्टर हैं। जॉर्डन और सीरिया में परिचालन परमाणु अनुसंधान रिएक्टर हैं। बहरीन, इराक, कुवैत, ओमान, कतर और सऊदी अरब सभी किसी न किसी प्रकार के परमाणु अनुप्रयोगों का उपयोग करते हैं।
आईएईए के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने एक बयान में कहा, "आईएईए के उद्देश्यों के अनुरूप, जैसा इसके क़ानून में निहित है, मैं सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने का अपना आह्वान दोहराता हूं, ताकि तनाव और अधिक बढ़ने से बचा जा सके।"श्री ग्रोसी ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी है और अप्रसार कार्यक्रम का हस्ताक्षरकर्ता होने के नाते देश को निरीक्षण के लिए एजेंसी को आने की अनुमति प्रदान करनी होगी। उन्होंने कहा कि एजेंसी के बार-बार अनुरोध और काहिरा समझौते के बावजूद ईरान ने पिछले साल की गर्मियों से इस्फहान जैसे महत्वपूर्ण स्थलों तक अनुमति नहीं दी है। उन्होंने कहा, "हम जल्द से जल्द पुनः अनुमति प्राप्त करना चाहते हैं।" हालांकि श्री ग्रोसी ने बताया कि एजेंसी पिछले गुरुवार तक ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रही है। आईएईए के महानिदेशक ने इस जटिल समस्या का समाधान खोजने के लिए संवाद की शीघ्र बहाली की सुविधा के लिए 'अनुरोध किये जाने पर सहायता' करने की एजेंसी की इच्छा भी व्यक्त की।



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