Shanivar Upay: शनिवार शाम को करें शनिदेव कि आरती, दूर हो जाएंगी सारी दुःख - तकलीफें!

Sat, Feb 28 , 2026, 09:30 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

मुंबई: हिंदू धर्म में कई देवी-देवता हैं। हर देवी-देवता को खुश करने के लिए अलग-अलग पूजा-पाठ किए जाते हैं। ग्रहों की भी पूजा की जाती है। एक ग्रह ऐसा है जिसका नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वो ग्रह हैं शनि देव! शनि देव को खुश करने के लिए भक्त रेगुलर सूरज डूबने के बाद उन पर सरसों का तेल चढ़ाते हैं। जब शनि देव खुश होते हैं तो वो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। शनि देव को न्याय का देवता या जज कहा जाता है।

ज्योतिष में कहा जाता है कि अगर शनि देव किसी इंसान पर खुश हो जाएं तो वो इंसान चाहे कोई भी हो, उसे राजा बनाने में देर नहीं लगाते। इसी तरह अगर शनि देव किसी इंसान से नाराज़ हो जाएं तो उसे पल भर में सड़क पर ला सकते हैं। अगर हमने कोई गलत काम किया है तो शनि देव हमें सज़ा दिए बिना नहीं रहते। इसी तरह अगर हमने कोई अच्छा काम किया है तो उसका फल भी हमें शनि देव की वजह से मिल सकता है। इसीलिए उन्हें न्याय का देवता कहा जाता है।

शनि देव को खुश करने के लिए सही समय पर पूजा करना ज़रूरी है। कहा जाता है कि सूरज उगने के बाद शनि देव की पूजा नहीं करनी चाहिए। अगर कोई सूरज उगने के बाद शनि देव की पूजा करता है, तो उसे शनि देव के गुस्से का सामना करना पड़ता है। शनिवार को सूरज डूबने के बाद शनि देव की आरती करनी चाहिए ताकि शनि देव खुश रहें। इससे भक्तों की मुश्किलें और दुख दूर होते हैं।

शनि देव की आरती -
जय जय श्री शनि देव, भक्ति फलदायी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी।
जय जय श्री शनि देव....

श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लंबर धर नाथ गज की असवारी।
जय जय श्री शनि देव....

क्रीटे मुकुट शीश राजित दीपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी।
जय जय श्री शनि देव....

मोदक मिष्ठान पान चढ़त है सुपारी। 
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी।
जय जय श्री शनि देव....

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी।
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।

हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार, अगर किसी भी देवी-देवता की पूजा के बाद आरती नहीं की जाती है, तो वह पूजा पूरी नहीं होती है। इसलिए शनि देव की पूजा के बाद आरती करनी चाहिए। शनि देव की आरती सरसों के तेल से की जाती है। इसमें काले तिल डालने चाहिए। अगर घर के पास कोई शनि मंदिर नहीं है, तो शनि देव की पूजा पीपल के पेड़ के नीचे या हनुमान मंदिर में भी की जा सकती है।

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