मुंबई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Draupadi Murmu) ने मंगलवार को कहा कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में सरकार के साथ-साथ सभी हितधारकों की समान भागीदारी आवश्यक है। श्रीमती मुर्मू ने आज यहां लोक भवन में पीडी हिंदुजा अस्पताल की ओर से आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान 'जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत (Healthy India) बनाओ' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पिछले एक दशक में भारत सरकार (Government of India)ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं कि प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। देशभर में 1,80,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवायें प्रदान कर रहे हैं। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 12 करोड़ परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि मिशन इंद्रधनुष, टीबी मुक्त भारत अभियान और सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम नागरिकों को गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गुणवत्तापूर्ण डॉक्टरों और पैरामेडिकल पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या में वृद्धि की गई है तथा कई राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा परोपकार है। आपातकालीन चिकित्सा सुविधा तक समय पर पहुंच जीवन बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री राहत योजना के माध्यम से 1.5 लाख रुपये तक का नकद उपचार प्रदान किया जाता है। एम्बुलेंस सेवाओं, ट्रॉमा सेंटरों और जन-जागरूकता अभियानों को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि आपात स्थिति में किसी की जान न जाए।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं। लोगों को बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उन्हें समय पर और उचित चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराना अनिवार्य है। स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है और यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है कि सबसे गरीब व्यक्ति तक भी सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंचे। "सभी को किफायती विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हम सबका मिशन होना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई और नई तकनीकों का महत्व और बढ़ेगा तथा देश को इसके लिए तैयार रहना होगा। इंडिया एआई मिशन स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है और सरकार इसके व्यापक उपयोग के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत एक अग्रणी दवा उत्पादक देश है और यहां निर्मित दवायें दुनिया भर में लोगों के उपचार में योगदान दे रही हैं। हालांकि कई चिकित्सा उपकरणों और महत्वपूर्ण दवाओं के लिए देश अभी भी आयात पर निर्भर है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। अपने नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए देश में ही दवाओं और उपकरणों का निर्माण बढ़ाना आवश्यक है। मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी पहलें इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रही हैं। राष्ट्रपति ने चिकित्सा और उद्योग जगत से अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वस्थ नागरिक मूलभूत आवश्यकता हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में और अधिक पहचान बनाएगा।



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