जयपुर: राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष (Rajasthan Assembly Speaker) वासुदेव देवनानी (Vasudev Devnani) ने गौ संरक्षण एवं गौ सेवा (cow protection and cow service) के क्षेत्र में अनुकरणीय पहल कर भामाशाहों के सहयोग से जयपुर और अजमेर की चार गौशालाओं को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। देवनानी ने यह सहयोग अमरापुर गौशाला, प. पू. माधव गौ विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, पुष्कर गौशाला, श्री आनंद गोपाल गौशाला संस्थाओं (Shri Anand Gopal Cow Shelter) को दिया है। इस अवसर पर देवनानी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दान, सेवा, त्याग और पुण्य का महत्व है। यह मदद आध्यात्मिक दृष्टि के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना की भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्राम्य जीवन की आत्मा है।
भारतीय कृषि परंपरा, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादों और पर्यावरण संतुलन में गौवंश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गौशालाएं केवल निराश्रित एवं परित्यक्त गौवंश की शरणस्थली ही नहीं हैं बल्कि वे समाज की करुणा, दायित्वबोध और जीव मात्र के प्रति संवेदनशीलता की जीवंत मिसाल हैं। प.पू. माधव गौ विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान पंचगव्य आधारित शोध, जैविक कृषि और स्वदेशी उत्पादों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। इस प्रकार के संस्थान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय के उदाहरण हैं।
पुष्कर गौशाला (Pushkar Gaushala) और अमरापुर गौशाला वर्षों से हजारों गौवंश की सेवा, चिकित्सा एवं संरक्षण के लिए निरंतर कार्यरत हैं। इन गौशालाओं में गौवंश के चारे, चिकित्सा सुविधा, आश्रय व्यवस्था एवं रख- रखाव के लिए निरंतर आर्थिक सहयोग की आवश्यकता बनी रहती है। आनंद गोपाल गौशाला भी गौ सेवा का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां समाज के सहयोग से निरंतर सेवा कार्य संचालित किये जा रहे हैं। देवनानी ने कहा कि संत समाज ने सदैव गौ सेवा को प्राथमिकता दी है। गौ संरक्षण आध्यात्मिक कर्तव्य के साथ ही सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरणीय संतुलन का विषय भी है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से आह्वान किया कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार गौशालाओं के सहयोग के लिए आगे आये और गौ सेवा को जनभागीदारी का अभियान बनायें।
उन्होंने भामाशाहों का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सामूहिक शक्ति ही ऐसे सेवा कार्यों को गति देती है। यह 20 लाख रुपये की सहायता राशि गौशालाओं में चारा क्रय, चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढीकरण, आधारभूत संरचना के विकास एवं गौवंश के संरक्षण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल गौ सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सहभागिता, आध्यात्मिक मूल्यों और मानवीय संवेदना का सशक्त उदाहरण भी है। देवनानी ने कहा कि मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर किया गया यह सहयोग समाज में सेवा, दान और सहयोग की परंपरा को नयी ऊर्जा प्रदान करेगा तथा गौ संरक्षण के प्रति जागरुकता और प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक संदेश का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधि, संत समाज और भामाशाह एक मंच पर आकर सेवा कार्यों को आगे बढ़ाते हैं, तो समाज में विश्वास और उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होती है। गौ संरक्षण का विषय किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का विषय है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की सहभागिता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गौशालाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समन्वय का केंद्र बन सकती हैं। व्यवस्थित प्रबंधन, संसाधन और समाज के निरंतर सहयोग से स्थानीय स्तर पर रोजगार, जैविक खेती के प्रसार तथा प्राकृतिक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए गौशालाएं सशक्त माध्यम बन सकती हैं। यह प्रयास सेवा, संस्कृति और सतत विकास का समन्वित मॉडल है।



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