शोध कार्यों का विस्तार गांव-गांव तक होना चाहिए: चौहान!

Tue, Feb 17 , 2026, 06:43 PM

Source : Uni India

जयपुर। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने शोध कार्यों का विस्तार गांव-गांव तक पहुंचाने की जरूरत बताते हुए पोषक तत्वों से भरपूर (biofortified) फसलों पर अधिक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया है। चौहान मंगलवार को जयपुर में श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय (Karan Narendra Agricultural University), जोबनेर अधीनस्थ इकाई राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (Agricultural Research Institute), दुर्गापुरा का दौरा कर वहां संचालित विभिन्न कृषि अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा एवं कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने गेंहू, जौ एवं चना की उन्नत किस्मों पर चल रहे शोध कार्यों तथा प्रायोगिक खेतों में हो रहे परीक्षणों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, उत्पादन क्षमता का विस्तार तथा देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

इस दौरान प्रायोगिक खेतों के निरीक्षण में वैज्ञानिकों ने श्री चौहान को उच्च उत्पादन देने वाली, कम पानी में बेहतर पैदावार करने वाली तथा रोग-प्रतिरोधी किस्मों (Disease-Resistant Varieties) की विशेषताओं से अवगत कराया। नयी कृषि तकनीकों, उन्नत बीज विकास कार्यक्रमों और वैज्ञानिक खेती पद्धतियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि इन अनुसंधानों का सीधा लाभ किसानों तक पहुंच रहा है। इस पर श्री चौहान ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शोध कार्यों का विस्तार गांव-गांव तक होना चाहिए। इस दौरान राजस्थान में जौ की स्थिति पर विशेष चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में जौ उत्पादन की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान है किंतु हाल के वर्षों में इसके रकबे में कमी आई है। इसे पुनः बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जौ की उन्नत किस्मों का उपयोग माल्ट उद्योग में हो रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहे हैं। इस दिशा में और समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

चना अनुसंधान की प्रगति की जानकारी लेते हुए श्री चौहान ने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नयी किस्मों और उत्पादन वृद्धि की रणनीतियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में वृद्धि देश की पोषण सुरक्षा (Nutritional Security) के लिए अत्यंत आवश्यक है। गेहूं की उन्नत एवं रोग-प्रतिरोधी किस्मों का विकास भी किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों से संवाद करते हुए उन्होंने पोषक तत्वों से भरपूर फसलों पर अधिक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे जनस्वास्थ्य में सुधार होगा और किसानों के लिए नए बाजार अवसर भी सृजित होंगे। चौहान ने स्पष्ट किया कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण कृषि अनुसंधान संस्थानों और किसानों के हितों को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं होनी चाहिए। चूंकि संस्थान अब शहर के मध्य स्थित है, अतः इसकी सुरक्षा और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। यदि अनुसंधान प्रभावित होगा तो उसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। इसलिए संस्थान की भूमि और शोध गतिविधियों की रक्षा करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

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