Maha Shivratri 2026 : इस साल की महाशिवरात्रि होगी खास! नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में हुए हैं 'ये' बड़े बदलाव

Fri, Feb 13 , 2026, 01:53 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

महा शिवरात्रि 2026: महाशिवरात्रि का त्योहार (festival of Mahashivratri)  भगवान शिव की पूजा का सबसे खास दिन माना जाता है। इस साल महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इसे देखते हुए नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर (Trimbakeshwar Mahadev Temple) में भक्तों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। बारह ज्योतिर्लिंगों में से पहले ज्योतिर्लिंग के तौर पर मशहूर इस पवित्र इलाके में महाशिवरात्रि पर 'बम बम भोले (Bam Bam Bhole)' का नारा लगाने वाले भक्तों की भीड़ रहेगी।

मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा, VIP दर्शन बंद
महाशिवरात्रि के दिन मंदिर रविवार सुबह 4 बजे से सोमवार रात 9 बजे तक बिना रुके दर्शन के लिए खुला रहेगा। लाखों भक्तों की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। महाशिवरात्रि पर VIP प्रोटोकॉल दर्शन, दान दर्शन और गर्भगृह दर्शन पूरी तरह से बंद रहेंगे। संस्थान ने आम भक्तों को बराबर मौके देने के लिए यह फैसला लिया है।

एंट्री का इंतज़ाम
सभी भक्तों को ईस्ट गेट दर्शन बाड़ी से एंट्री मिलेगी। 14 फरवरी से 16 फरवरी तक, सुबह मंदिर खुलने से लेकर 10.30 बजे तक, लोकल गांव वालों को खास छूट दी गई है। गांव वाले अपना पहचान पत्र दिखाकर वेस्ट गेट से अंदर जा सकेंगे। दर्शन के बाद उन्हें साउथ गेट से बाहर निकलना होगा, यह सुविधा सिर्फ लोकल लोगों के लिए होगी।

सिक्योरिटी और सुविधाएं
त्र्यंबकेश्वर इलाके में पुलिस की कड़ी तैनाती रहेगी और संस्थान के सिक्योरिटी गार्ड भी उनकी मदद के लिए वहां मौजूद रहेंगे। मंदिर इलाके में CCTV निगरानी रखी जाएगी। पीने के पानी का इंतज़ाम किया गया है। एक हेल्थ टीम तैनात की जाएगी। प्रसाद का इंतज़ाम किया गया है।

डेकोरेशन और लाइटिंग
मंदिर को आकर्षक स्ट्रक्चरल इलेक्ट्रिक लाइटिंग से सजाया गया है। गर्भगृह, सभा मंडप, उत्तर और पूर्व महाद्वारों को फूलों से सजाया जाएगा। महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर परिसर में दिव्यता से रोशनी की जाएगी।

पालकी की रस्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम
15 फरवरी को दोपहर 3 बजे त्र्यंबकराज की पालकी मंदिर से निकलेगी। यह पारंपरिक रास्ते से तीर्थराज कुशावर्त जाएगी। वहां षोडशोपचार पूजा की जाएगी। पालकी शाम 5 बजे तक मंदिर वापस आ जाएगी। शाम 5 बजे लघुरुद्र अभिषेक किया जाएगा। रात 11 बजे महापूजा और अंदरूनी पालकी की रस्म होगी। 14 फरवरी को शाम 7 बजे से रात 9.30 बजे तक श्रीधर फड़के का "गीत रामायण" कार्यक्रम होगा। 16 फरवरी को कई तरह के कथक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

महादेव को प्रसन्न करने के लिए क्या करना चाहिए?
महाशिवरात्रि पर व्रत का खास महत्व है। पूरा व्रत या फलाहार किया जा सकता है। सुबह जल्दी उठें, नहाएं और साफ कपड़े पहनें। घर या मंदिर में शिवलिंग की पूजा करें। शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। दूध, दही, घी, शहद और चीनी से पंचामृत अभिषेक करना चाहिए। बिल्वपत्र चढ़ाना चाहिए। धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाना चाहिए। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। महाशिवरात्रि जागरण की रात है। अगर आप चारों प्रहर में पूजा करते हैं, तो आपको खास पुण्य मिलता है। पहले प्रहर में जलाभिषेक, दूसरे प्रहर में दूधाभिषेक, तीसरे प्रहर में घी का अभिषेक, चौथे प्रहर में शहद का अभिषेक करना चाहिए।

व्रत के नियम
प्याज और लहसुन खाने से बचें। सात्विक खाना खाएं। मन को साफ रखें। गुस्से और जलन से बचें। गरीबों को खाना दान करें और सेवा करें। गायों को चारा खिलाएं। जरूरतमंदों की मदद करें।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि की रात आत्मचिंतन की रात है। शिव का मतलब है कल्याण। अहंकार छोड़कर भक्ति रखनी चाहिए। महाशिवरात्रि भक्ति, विश्वास और धैर्य का त्योहार है। भक्तों का मानना ​​है कि त्र्यंबकेश्वर में भगवान शिव के दर्शन करने से जीवन धन्य हो जाता है और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

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